कनीना। कनीना के पुराना बाजार में चल रही श्रीमद्देवी भागवत कथा के सातवें दिन वीरभद्र के प्रसंग का वर्णन किया गया। कथा व्यास ने कहा कि बिना निमंत्रण के कही भी नहीं जाना चाहिए।
कथा व्यास पंडित हेमराज भारद्वाज ने कहा कि माता सती के पिता प्रजापति दक्ष शिव जी पसंद नहीं करते थे, क्योंकि शिवजी ब्रह्माजी का पांच में से एक सिर काट दिया था। अपने पिता ब्रह्माजी के साथ हुई इस घटना की वजह से दक्ष शिवजी को अपमानित करने के अलग-अलग अवसर खोजते रहते थे। दक्ष की पुत्री सती ने भगवान शिव से विवाह कर लिया था और दक्ष इस विवाह को रोक नहीं सके। विवाह के कुछ समय बाद दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया और इस यज्ञ में सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन शिव और सती को आमंत्रित नहीं किया। माता सती नहीं मानी और यज्ञ में चली गईं।
सती ने पिता दक्ष से शिवजी को न बुलाने का कारण पूछा तो दक्ष ने शिवजी के लिए अपमानजनक बातें कहना शुरू कर दी। शिव का अपमान सती सहन नहीं कर सकी और उन्होंने हवन कुंड में कूदकर अपनी देह त्याग दी। जब ये बात भगवान शिव को मालूम हुई तो वे बहुत क्रोधित हुए। शिवजी के क्रोध से वीरभद्र प्रकट हुए। इसके बाद शिव के कहने पर वीरभद्र ने यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और दक्ष का सिर काट दिया। इस मौके पर गुरु शरण गुप्ता, राजेंद्र राठी, श्यामलाल, लक्ष्मी देवी, शकुंतला, कुसुम लता, मास्टर नेमी चंद, योगेश गुप्ता, उमेद देवी, धर्मेंद्र, सुभाष कौशिक सतनाली नीरज, अनीता, गीता, रचना मौजूद रहे