संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। शहर के नागरिक अस्पताल में जिले के साथ-साथ राजस्थान की महिलाएं भी प्रसव के लिए पहुंच रही हैं, लेकिन इसके बावजूद महिला चिकित्सकों के दो पद रिक्त पड़े हैं, जिससे कई बार गर्भवती को प्रसव के लिए रेफर कर दिया जाता है। इससे गर्भवती के साथ आए परिजन नर्स व अन्य स्टाफ कर्मियों के साथ झगड़ा तक करने लग जाते हैं। इसके बावजूद रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा है।
अभी हाल ही में रिक्त पदों को भरने के लिए एमएस डॉ. कंवर सिंह की तरफ से सिविल सर्जन को डेपुटेशन पर चिकित्सक लगाने के लिए पत्र भी लिखा गया है, ताकि गर्भवती को ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े। लेबर रूम में अव्यवस्था के चलते बीते एक माह पहले स्टाफ नर्स व गर्भवती के परिजनों के बीच मारपीट तक की नौबत आ गई थी। नागरिक अस्पताल में छह पद हैं, जिनमें से दो रिक्त हैं। दो स्थायी और दो डेपुटेशन पर महिला चिकित्सक तैनात हैं। ऐसे में गर्भवती की जांच के लिए एक चिकित्सक ओपीडी में चली जाती है। इससे बाकी तीन महिला चिकित्सकों के सहारे कैसे गर्भवती का प्रसव समय पर करवाया जा सकता है।
नौ माह में 450 गर्भवती को किया गया रेफर
नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की कमी की वजह से रोहतक रेफर करना पड़ रहा है। अगर जनवरी से सितंबर तक की बात करें तो करीब 450 महिलाओं को रेफर किया जा चुका है। कई बार रात के समय गर्भवती महिला के आने पर चिकित्सक उपलब्ध नहीं रहता है, जिससे रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में गर्भवती के परिजन रोहतक जाने के बजाय नारनौल में निजी अस्पताल में प्रसव करवाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। रोहतक तक टूटी सड़क में गर्भवती महिला की हालात और अधिक खराब हो जाती है।
प्रतिदिन 10 सीजेरियन और 20 सामान्य प्रसव हो रहे
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन करीब 20-22 महिलाओं का सामान्य प्रसव करवाया जा रहा है, वहीं प्रतिदिन करीब 10-12 महिलाओं का सीजेरियन ऑपरेशन किया जाता है। ऐसे में प्रसव के बाद महिलाओं की समय-समय पर जांच जरूरी होती है, लेकिन समय पर जांच नहीं होने पर महिला के परिजन स्टाफ के साथ झगड़ा करने लग जाते हैं। अगर जनवरी से अब तक की बात करे तो सीजेरियन के करीब 2700 व सामान्य प्रसव करीब 5400 महिलाओं का नारनौल के नागरिक अस्पताल में प्रसव करवाया जा चुका है।
सीजेरियन के लिए तो चिकित्सकों की कमी नहीं है, लेकिन लेबर रूम में महिला चिकित्सकों की कमी है, जिसके लिए सिविल सर्जन को डेपुटेशन पर चिकित्सक लगाने के लिए पत्र भी लिखा गया है।
- डॉ. कंवर सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल नारनौल।
महिला चिकित्सकों की कमी को दूर किया जा रहा है। गर्भवती को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
- डाॅ. रमेश चंद्र आर्य, सिविल सर्जन नारनौल।