सतनाली। माता जमुवाए मंदिर में नौ दिवसीय श्रीराम कथा एवं दुर्लभ सत्संग आठवें दिन श्रीराम व सबरी मिलन व लंका दहन की कथा सुनाई गई। कथाव्यास महाराज कृष्ण ने बताया कि सबरी माता का असली नाम श्रमणा था, यह भील समुदाय के शबर जाति से संबंध रखती थीं। इसी कारण कालांतर में उनका नाम शबरी हुआ।
शबरी के पिता भीलों के मुखिया थे। उन्होंने शबरी का विवाह भील कुमार से तय कर दिया। शादी से पहले कई भेड़-बकरियों को बलि के लिए लाया गया, जिन्हें देखकर शबरी का मन विचलित हो उठाए क्योंकि उन्हें बेजुबान जानवरों से बेहद लगाव था। माता शबरी को रामायण के पात्रों में विशेष स्थान दिया गया है। शबरी माता ने अपना संपूर्ण जीवन श्रीराम की भक्ति में बिताया रामायण के अनुसार सीता की खोज करते हुए भगवान राम की शबरी से भेंट हुई थी। इसके लिए उन्होंने सालों तक मर्यादा पुरुषोत्तम राम की प्रतीक्षा की रामायण के उस प्रसंग को तो सभी जानते हैं कि श्रीराम ने शबरी के हाथों से बेर खाए थे। कथा के दौरान महाराज कृष्ण ने बताया कि राक्षस राजा रावण ने हनुमान की पूंछ में आग लगाने का आदेश देते हैं। तो हनुमान जी रावण की सोने की लंका को जलाकर उसका अहंकार तोड़ देते है। उन्होंने बताया कि बुधवार को राम राज्य अभिषेक के बारे में बताया जायेगा। इस दौरान कृष्ण, श्यामलाल, हरि सिंह, विनोद, धूप सिंह, मुनेश, शांति देवी, जमुना देवी, इंद्र देवी सहित अनेक भक्त मौजूद रहे।