नारनौल। संतोष मेमोरियल दिव्यांगजन एवं पुनर्वास केंद्र में मंगलवार को संस्कार निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें स्पेशल डिप्लोमा और स्पेशल बीएड पाठ्यक्रम के छात्रों ने भी भाग लिया। मुख्य अतिथि के रूप में आध्यात्मिक गुरु कप्तान जगराम आर्य, रिटायर्ड प्राचार्य जेपी कौशिक एवं संस्था के प्राचार्य डॉ. आरएन यादव उपस्थित रहे।
कार्यशाला का उद्देश्य समाज में संस्कारों के महत्व को उजागर करना और प्रतिभागियों को वैदिक संस्कृति से जोड़ना था। कप्तान जगराम आर्य ने वैदिक परंपरा में वर्णित 16 संस्कारों पर विस्तार से चर्चा की। आध्यात्मिक गुरु कप्तान जगराम आर्य ने कहा कि संस्कार जीवन की आधारशिला है। ये व्यक्ति को नैतिकता, अनुशासन और आदर्शों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
रिटायर्ड प्राचार्य जेपी कौशिक ने कहा कि संस्कार हमारी पहचान और संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। इनका पालन कर हम न केवल समाज, बल्कि राष्ट्र को भी सशक्त बना सकते हैं। संस्था के प्राचार्य डॉ. आरएन यादव ने महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन से जुड़ते हुए संस्कारों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद ने अपने जीवन में संस्कारों का पालन करते हुए समाज को एक नई दिशा दी। संस्कार न केवल व्यक्तिगत विकास में सहायक हैं, बल्कि ये राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार भी हैं। उन्होंने छात्रों को महर्षि दयानंद के विचारों और उनके लेखन को समझने के लिए सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक पढ़ने की प्रेरणा दी। स्पेशल एजुकेशन के छात्रों और अध्यापकों ने भी विचार साझा किये।