सतनाली में खाद के इंतजार में खड़े किसान।
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खाद को लेकर किसानों की परेशानियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। वीरवार को गांव खातोदड़ा के किसानों को दस किलोमीटर दूर महेंद्रगढ़ थाने में टोकन दिए गए। किसान दिनभर पैक्स के बिक्री केंद्र व थाने के चक्कर लगाते रहे। जबकि आकोदा स्थित केंद्र पर किसानों की अधिक भीड़ के कारण किसानों ने हंगामा खड़ा कर दिया इसके बाद पुलिस की उपस्थित में खाद का वितरण शुरू किया गया। सतनाली में भी किसानों की भीड़ खाद के लिए केंद्र के बाहर उमड़ी। महेंद्रगढ़ थाने में किसानों को बुलाकर टोकन बांटे गए। दिनभर की भागदौड़ के बावजूद भी अनेक किसानों के हाथ खाली रहे।
गांव खातोदड़ा स्थित पैक्स के बिक्री केंद्र पर वीरवार को 600 बैग डीएपी खाद पहुंचा था। खाद आने की सूचना के बाद केंद्र के बाहर किसानों की भीड़ जमा हो गई। पहले खाद लेने के प्रयास में किसानों ने हंगामा खड़ा कर दिया। व्यवस्था नहीं बनती देख केंद्र के कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों को भी थाने बुला लिया। इसके बाद किसानों को थाना परिसर में लाइनों में बैठाकर करीब 12 बजे से टोकन वितरण शुरू किया गया।
कोऑपरेटिव सोसायटी केंद्र में 800 बैग डीएपी खाद पहुंची। वीरवार को महज टोकन ही दिए गए जबकि शुक्रवार को खाद वितरण किया जाएगा। खाद की सूचना के बाद किसान सुबह पांच बजे ही एकत्रित होने शुरू हो गए। इसके बाद पुलिस की उपस्थिति में व्यवस्था बनाकर 300 किसानों टोकन वितरित किए गए। कृषि अधिकारी रमेश बजाड़ ने बताया कि किसानों की भीड़ को देखते हुए पुलिस की उपस्थित में खाद वितरण प्रक्रिया शुरू की गई है।
आकोदा स्थित केंद्र पर जैसे ही खाद आने की सूचना किसानों को मिली तो सुबह चार बजे ही गर्म वस्त्र पहनकर किसान लाइनों में लगे। केंद्र खुलते ही व्यवस्था चरमरा गई। इसके बाद किसानों ने हंगामा खड़ा कर दिया। इसके बाद मौके पर पुलिस कर्मचारियों ने पहुंचकर पहले व्यवस्था बनाई फिर टोकन देकर खाद का वितरण शुरू करवाया।
खाद लेने को सुबह से ही खाली पेट जद्दोजहद शुरू हो गई थी। पहले केंद्र पर अधिक भीड़ होने के कारण पुलिस को बुलाया गया। इसके बाद थाने में टोकन बांटे गए। दिनभर भागदौड़ के बाद केवल टोकन ही मिला अब खाद के लिए केंद्र पर दोबारा से जाना पड़ेेगा। - महिला किसान मकतूल
पहले सरसों बिजाई के लिए खाद को लेकर मारामारी रही। अब तय समय में गेहूं की बिजाई करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं आने से क्षेत्र के किसानों को दिनभर भागदौड़ के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। - किसान चंद्रभान, देवराली