संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। विज्ञान मंच के जिला संयोजक धर्मपाल शर्मा ने बताया नए साल की शुरुआत आसमान में एक दुर्लभ खगोलीय संयोग के साथ होने जा रही है। 3 जनवरी को आकाश में वुल्फ मून दिखाई देगा।
इसी दिन पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट बिंदु पर भी पहुंचेगी जिसे खगोल विज्ञान में उपसौर कहा जाता है। उन्हाेंने बताया कि जनवरी की पूर्णिमा को वुल्फ मून कहा जाता है।
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार सर्दियों के मौसम में भेड़ियों की आवाज से अधिक सुनाई देने के कारण इस पूर्णिमा का नाम वुल्फ पड़ा। चंद्रमा पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट होने के कारण सामान्य से कुछ बड़ा और अधिक चमकीला नजर आएगा। मौसम साफ रहने पर इसे बिना किसी दूरबीन या विशेष उपकरण के आसानी से देखा जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि इस दिन पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होगी। यह भारतीय समय अनुसार रात लगभग 10:45 पर घटित होगा। इस दौरान पृथ्वी सूर्य से लगभग 14 करोड़ 70 लाख 99894 किलोमीटर की दूरी पर होगी। उपसौर के समय पृथ्वी अपनी कक्षा में सबसे तेज गति से चलती है जो लगभग 30.27 किलोमीटर प्रति सेकेंड होती है।
इसके विपरीत जब पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होती है तो उसे अपसौर कहा जाता है। जो वर्ष 2026 में 6 जुलाई को पड़ेगा। इसका कारण सूर्य से दूरी नहीं बल्कि पृथ्वी का 23.5 डिग्री का अक्षीय झुकाव है। जनवरी में उत्तरी गोलार्ध सूर्य से दूर की ओर झुका होता है जिससे सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती है और ठंड का मौसम रहता है।