संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। इस बार अप्रैल में ही तापमान में इजाफा हुआ है जिससे गर्मी से लोगों की हालत खराब है। दोपहर में तल्ख धूप और गर्म हवा चलने से लोग बाहर निकलने से बच रहे हैं। गर्मी बढ़ने से उल्टी-दस्त और बुखार की मरीजों की संख्या बढ़ी है। आगामी दिनों में तापमान में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि 20 अप्रैल तक तापमान में बढ़ोतरी और लू जारी रहने के आसार हैं। 21 अप्रैल से 26 अप्रैल तक हवा की दिशा में बदलाव होगा और हवा उत्तरी होने के कारण क्षेत्र में पर बढ़ते हुए तापमान पर अंकुश लगेगा और हीट वेब लूं का खात्मा होगा। इसके बाद हीट वेब लू का तीसरा दौर देखने को मिलेगा। नारनौल में शनिवार को अधिकतम तापमान 41.0 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
तेज धूप के कारण हिट स्ट्रोक का खतरा : तेज धूप में ज्यादा देर तक रहने से निर्जलीकरण और हिट स्ट्रोक का खतरा बना रहता है। तेज धूप के कारण शरीर में तापमान नियंत्रित करने की क्षमता खत्म हो जाती है। चक्कर आना, बेहोशी, आंखों के आगे अंधेरा छा जाना और जुबान तुतलाना और भ्रम की स्थिति हिट स्ट्रोक के लक्षण हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण हिट स्ट्रोक जानलेवा भी हो सकता है। हिट स्ट्रोक और निर्जलीकरण से बचाव के लिए आवश्यक है कि तेज धूप में कम कम से बाहर निकलें और ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन करें ताकि शरीर में तापमान की स्थिति बने रहें।
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नागरिक अस्पताल में उल्टी-दस्त की बढ़ी ओपीडी
अधिक गर्मी पड़ने के कारण पेट दर्द, उल्टी-दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अधिक गर्मी से सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं। नागरिक अस्पताल में ओपीडी की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सामान्य दिनों में नागरिक अस्पताल में 1000 से 1100 तक ओपीडी रहती है , लेकिन अब 1200 से 1300 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
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वर्जन :
तेज धूप के कारण निर्जलीकरण और हिट स्ट्रोक की संभावना रहती है और समय पर उचार नहीं मिलने पर यह खतरनाक साबित हो सकता है। गर्मी में स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है कि तेज धूप में जरूरी हो तब ही बाहर निकलें। ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं व संतुलित आहार का सेवन करें। शरीर में पानी की कमी होने पर नींबू व नमक मिला कर पानी पीएं। वहीं तरबूज, खरबूजा और नारियल पानी सहित ऐसे फलों का अधिक सेवन करें जो शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित रखें। -डॉ. जितेंद्र यादव, नागरिक अस्पताल नारनौल।