नारनौल। नारनौल के रहने वाले गोविंद भारद्वाज ने देश में करीब 21 महीने की इमरजेंसी में काफी यातनाओं को सहन किया। वह 18 माह 23 दिन तक बुलंदशहर जेल में रहे।
गोविंद भारद्वाज ने बताया कि एक सितंबर 1975 का दिन था, जब वह संघ कार्यवाहक प्रोफेसर राजेंद्र सिंह उर्फ रज्जू भैया के साथ उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हापुड़ किसी बैठक के लिए जाने के लिए तैयार हो रहे थे। तभी
किसी व्यक्ति
ने उनकी जानकारी लोकल इंटेलीजेंस यूनिट को दे दी। इसकी वजह से योजना बदली और रज्जू भैया (जो बाद में सर संघचालक बने) को किसी अन्य स्वयं सेवक के साथ मोटरसाइकिल से हापुड़ रवाना किया। वहीं उन्होंने बस से हापुड़ थोड़ा लेट जाने की योजना बनाई।
जब वह आधे घंटे बाद बस स्टैंड पर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में पहुंचे तो सब कुछ सामान्य लग रहा था। वह बस का इंतजार करने लगे। बेंच पर बैठ कर अखबार पढ़ने की एक्टिंग कर अपने को छिपाने की कोशिश करते रहे, लेकिन 15-20 मिनट बाद बस स्टैंड पर पुलिस की चलहकदमी शुरू हो गई। कुछ देर में उन्हें चारों तरफ से घेर लिया गया।
तभी सीआईडी के तीन अधिकारी रिवॉल्वर तानकर कहने लगे मिस्टर भारद्वाज हैंड्स अप यू आर अंडर अरेस्ट। इस पर उन्होंने कहा कि मैं गोविंद भारद्वाज नहीं हूं, मैं विपिन हूं, फिर भी उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया। एलआईयू दफ्तर व उसके बाद थाना कोतवाली बुलंदशहर ले जाया गया। वहां तलाशी के दौरान पूछने लगे कि पेन पिस्टल कहां है। सीआईडी में चर्चा थी कि हरियाणा का लड़का पेन पिस्टल रखता है। उसे ध्यान से गिरफ्तार करना।
बता दें कि गोविंद भारद्वाज अभी संगठन में सुशासन विभाग भाजपा हरियाणा के प्रांत प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके अलावा हरियाणा कृषि उद्योग निगम के चेयरमैन भी रह चुके हैं। लोकतंत्र सेनानी संघ में राष्ट्रीय मंत्री के नाते सक्रिय हैं।
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गिरफ्तारी के बाद सैकड़ों घरों में रात को नहीं बना था खाना
गोविंद भारद्वाज की गिरफ्तारी पर संघ के सैकड़ों स्वयंसेवकों के घरों में रात्रि का खाना नहीं बना। जब 14 दिन बाद पहली बार कोर्ट में पेशी पर गये तो 27 परिवार ने खाना टिफिन लाए। इसे उन्होंने पुलिस वालों के साथ बैठकर खाया। उसे एक दो पेशी के बाद मीसा बंदी बना दिया। इसके बाद 23 मार्च 1977 तक कारावास में रहा। यानी 18 माह 23 दिन तक जेल में रहा। जेल में ही तीन मीसा बंदी शहीद हो गए थे।
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जेल से राजनीति शास्त्र में एमए करने की ठानी
जेल से राजनीति शास्त्र में एमए करने की सोची। इसके बाद फार्म भरा ताकि वह उत्तर पुस्तिकाओं में इमरजेंसी की गाथा व यातना लिख सकें, लेकिन जेल से परीक्षा देने के लिए मना कर दिया गया। हालांकि मेरठ युनिवर्सिटी ने एक विद्यार्थी के लिए बुलंदशहर जेल को ही डीएवी कॉलेज बुलंदशहर का एक सब सेंटर घोषित कर दिया, जहां उसने परीक्षा दी।