फोटो नंबर-16अग्रवाल सभा में अग्र भागवत कथा का श्रवण करती महिलाएं। स्रोत-संस्था
नारनौल। अग्रवाल सभा भवन में आयोजित अग्र भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को कथा व्यास श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नर्मदा शंकर पुरी महाराज ने अग्र महाराज के जीवन प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्री अग्रसेन जी की एक पुत्री ईश्वरी भी थी जिनका विवाह काशी राज के पुत्र महेश के साथ हुआ।
महेश ने आगे चलकर मोक्ष मार्ग अपनाया और धर्म के मार्ग पर अग्रसर हुए।कथा व्यास ने बताया कि श्री अग्रसेन जी ने 18 यज्ञों का संकल्प लेकर 18 ऋषियों को आमंत्रित किया और अपने पुत्रों को 18 गोत्रों में विभाजित कर अलग-अलग राज्यों का दायित्व सौंपा।
उन्होंने क्षत्रिय वंश का त्याग कर वैश्य वर्ण को अपनाया और अपनी प्रजा तथा पुत्रों को व्यापार व कृषि के माध्यम से समाज की उन्नति करने का संदेश दिया।
महामंडलेश्वर नर्मदा शंकर पुरी महाराज ने बताया कि श्री अग्रसेन जी ने माता लक्ष्मी को शक्ति रूप में प्रकट कर इंद्र का मान मर्दन किया, जिससे धर्म और न्याय की स्थापना हुई। साथ ही श्री अग्र भागवत में सुदामा शाकुंतल ब्राह्मण के कष्टों का निवारण कर न्याय की परंपरा का भी उल्लेख किया गया।
उन्होंने कहा कि श्री अग्रसेन महाराज का संपूर्ण जीवन 108 वर्षों का रहा। जीवन के अंतिम चरण में उन्होंने मोक्ष की प्रार्थना करते हुए अपने शरीर को त्याग कर मुक्ति प्राप्त की। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से प्रवचन सुने और धार्मिक वातावरण में जयकारों के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।