फोटो 05रामलीला के तहत परशुराम व लक्ष्मण संवाद करते हुए। प्रवक्
नारनौल। अनाज मंडी स्थित श्री कृष्णा ड्रामेटिकल क्लब के मंच पर भगवान नारायण सेवा संस्था की ओर से रामलीला मंचन के चौथे दिन धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया। मंच संचालक भारत भूषण तायल ने किया।
प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने बताया कि शिव धनुष टूटने के बाद पहुंचे परशुराम आक्राेशित हो गए। इस पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम कहते हैं, हैं कि नाथ शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला कोई एक दास ही होगा। इसके बाद परशुराम और लक्ष्मण का संवाद होता है, जिसे सुनकर दर्शक उत्साहित हो उठते हैं। इसके बाद राजा जनक के दरबार में आयोजित सीता स्वयंवर में कई राजा सम्मिलित होने का मंचन किया।
जहां राम, लक्ष्मण से लेकर रावण तक मौजूद होते हैं। आकाशवाणी के कारण रावण चला जाता है। इसके बाद धनुष उठाने की कार्रवाई शुरू होती है। सभी राजा धनुष को उठाने के लिए पूरा जोर लगाते हैं, लेकिन शिव धनुष उनसे टस से मस भी नहीं होता है। यह देखकर राजा जनक दुखी होकर ये कहते हैं कि यदि मुझे ये पता होता कि पृथ्वी वीर विहीन हो गई तो मैं स्वयंवर का आयोजन ही नहीं करता।
यह सुनकर लक्ष्मण आवेश में आ जाते हैं और वे आवेश में आकर श्रीराम के बल एवं गुणों का बखान करते हैं। तब विश्वामित्र का इशारा पाकर राम धनुष की ओर चलते हैं और देखते ही देखते धनुष को उठाकर सहज ही भंग कर देते हैं। उपस्थित राजाओं में खलबली मचती है।
तभी परशुराम आ जाते हैं, वे अपना आक्रोश प्रदर्शित करते हुए धनुष तोड़ने वाले की हत्या करने को तैयार हो जाते हैं तब लक्ष्मण आवेश में आकर परशुराम को बहुत कुछ कहते हुए समझाने का प्रयास करते हैं लेकिन राम के शांति प्रदर्शन ने परशुराम का गुस्सा शांत कर दिया। परशुराम ने राम की परीक्षा लेने के लिए राम को अपना धनुष चढ़ाने के लिए दिया।
राम ने सहज ही धनुष को चढ़ा दिया जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि ईश्वर का अवतार है।