कनीना। गांव धनौंदा अपनी ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक एकता, सैनिक परंपरा और धार्मिक आस्था के लिए जिले में खास पहचान रखता है। वर्तमान में गांव की आबादी 12 हजार के आसपास पहुंच चुकी है जबकि वर्ष 2011 की जनगणना में यहां की जनसंख्या लगभग 8 हजार थी।
ग्रामीणों के अनुसार गांव खुड़ाना के ठाकुर धनजी सिंह के पुत्र ठाकुर नीमराव सिंह उर्फ नाभा सिंह ने विक्रमी संवत् 1321 (सन् 1264 ईस्वी) में वैशाख सुदी दौज के दिन अपने पिता ठाकुर धनजी सिंह के नाम पर गांव धनौंदा की स्थापना की थी। ठाकुर नीमराव सिंह तंवर गोत्र से संबंधित थे और उनके वंशजों ने ही गांव की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाया।
गांव के अधिकांश लोग खेती और पशुपालन से जुड़े हैं। इसके अलावा प्रजापति व खाती समाज की हस्तकला से भी गांव जिले में प्रसिद्ध है।
चार पानों में बसा है गांव
गांव धनौंदा चार प्रमुख पानों में विभाजित है जिनमें सिंघान पाना, जसरान पाना, डुमान पाना और सालभान पाना प्रमुख हैं। इन पानों का इतिहास ठाकुर नीमराव सिंह के वंशजों से जुड़ा हुआ है। आज भी गांव की सामाजिक संरचना में इन पानों का विशेष महत्व है।
राजनीति का मजबूत केंद्र बना धनौंदा
अटेली विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में धनौंदा का विशेष प्रभाव माना जाता है। गांव की एकजुटता और सामाजिक भागीदारी के कारण यह क्षेत्र का राजनीतिक केंद्र बन चुका है। समाजसेवी व अधिवक्ता ठाकुर अतरलाल वर्ष 2014, 2019 और 2024 में अटेली विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं।
सतीश कौशिक ने बढ़ाया गांव का गौरव
बॉलीवुड के प्रसिद्ध हास्य अभिनेता, निर्देशक और निर्माता सतीश कौशिक का जन्म भी इसी गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी कला और अभिनय से देश-विदेश में पहचान बनाई और गांव धनौंदा का नाम हरियाणा से लेकर मुंबई तक पहुंचाया। उनका बचपन भी गांव धनौंदा की गलियों में बीता था।
बाबा दयाल मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र
गांव का बाबा दयाल मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रतिवर्ष भादवा सुदी दूज को मेले का आयोजन होता है। हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर माथा टेकते हैं।
सैनिकों और शिक्षकों का गांव
धनौंदा की पहचान सैनिकों और शिक्षकों के गांव के रूप में भी है। गांव के लगभग 450 जवान वर्तमान में भारतीय सेना एवं सुरक्षा बलों में सेवाएं दे रहे हैं जबकि 600 से अधिक पूर्व सैनिक गांव में निवास करते हैं। इसके अलावा करीब 100 शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में सेवारत हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से सुसज्जित है गांव
गांव में आठ आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। शिक्षा के लिए राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला, राजकीय बाल प्राथमिक पाठशाला और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्थापित हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पशु अस्पताल भी मौजूद है। इसके अलावा ग्राम सचिवालय, पुस्तकालय और खेल स्टेडियम जैसी सुविधाएं भी ग्रामीणों को उपलब्ध हैं।
गांव की कहानी-ग्रामीणों की जुबानी
गांव खुड़ाना के ठाकुर धनजी सिंह के सुपुत्र ठाकुर नीमराव सिंह उर्फ नाभा सिंह ने विक्रमी संवत् 1321 तदनुसार सन् 1264 ई. में वैशाख सुदी दौज को अपने पिता ठाकुर धनजी सिंह के नाम पर गांव धनौंदा बसाया। ठाकुर नीमराव सिंह के सातवीं पीढ़ी के वंशज सिंहराज सिंह उर्फ सिंहान सिंह के वंशजों से गांव का सिंहानपाना बना।
- ठाकुर अतरलाल, समाजसेवी
गांव में बाबा दयाल का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है यहां पर हरियाणा राजस्थान सहित अन्य जगहों से लोग जाकर माथा टेकते हैं मन्नत मांगते हैं। गांव में एकता है और गांव में आसपास क्षेत्र के लोग भी गांव की एकता को मानते है।
- अशोक, ग्रामीण
गांव में दो खेल स्टेडियम बने हुए हैं गांव के खेल की टीम दूसरे राज्यों तक फेमस है। गांव में राष्ट्रीय लेवल के खिलाड़ी कोच रहे हैं। गांव में खेल के भावना एकता बहुत अच्छी है। गांव में नए खिलाड़ी भी अलग खेलों में अपना दमखम दिखा रहे हैं।
- मुकेश तंवर, ग्रामीण
गांव जब बसाया तो उसे वक्त गांव में एक जांट (जॉन्टी) का पौधा लगाया था। जो आज भी लगा हुआ है उसका तना कमजोर हो नीचे गिर गया और वह पेड़ दोबारा से फिर अच्छे लेवल पर ऊंचा उठ गया। उसके पास ही एक सती माता का मंदिर है।
- पूर्ण सिंह, ग्रामीण
गांव एक नजर में
- वर्तमान आबादी : लगभग 12 हजार
- कुल घर : करीब 1,800
- कुल मतदाता : लगभग 4,500
- प्रमुख व्यवसाय : खेती, पशुपालन, हस्तकला एवं फर्नीचर निर्माण
- सैनिक : 450 से अधिक
- पूर्व सैनिक : 600 से अधिक
- शिक्षक : लगभग 100
- राजकीय विद्यालय : 3
- आंगनबाड़ी केंद्र : 8
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र : 1
- पशु अस्पताल : 1
- खेल स्टेडियम : 2
- ग्राम सचिवालय एवं पुस्तकालय : उपलब्ध
फोटो70 पूर्ण सिंह
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