शिवाजी नगर स्थित जिला विजिलेंस का कार्यालय। संवाद
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प्रदेश के गठन के पांच दशक बाद भी जिले के 10 सरकारी कार्यालय शहर के गली, कूचों में किराये के भवनों में चल रहे हैं। ऐसे में इन कार्यालयों में काम से आने वाले लोगों को कार्यालय तलाश करने में परेशानी होती है। आंगनबाड़ी कार्यालय मोहल्ला न्यू जमालपुर कॉलोनी में किराये के भवन में चल रहा है। इस कार्यालय में रोजाना सैकड़ों की संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका आती हैं। पुरानी कचहरी के पास जिला प्रबंधक अनुसूचित जाति व जनजाति कार्यालय के साथ में जिला विजिलेंस कार्यालय भी किराये के भवन में चल रहा है। जिसके चलते इन कार्यालयों में आने वाले लोगों को परेशानी होती है। प्रदेश सरकार ने घोषणा कि थी कि लोगों को एक छत के नीचे सभी सरकारी कार्यालय मिलेंगे पर ऐसा नहीं है। अगर बात जिला सचिवालय कि करें तो करीब दस सरकारी कार्यालय जिला सचिवालय से दूर किराये के भवनों में चल रहे हैं। अगर किसी को सचिवालय में काम खत्म करने के बाद शिक्षा विभाग या विजिलेंस कार्यालय जाना हो तो उन्हें दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। लेकिन स्थानीय प्रशासन या सरकार उनकी दिक्कतों पर ध्यान नहीं दे रही है। शिक्षा विभाग का कार्यालय हुडा सेक्टर में बने स्कूल के भवन में चल रहा है।
मिनी सचिवालय से दो से तीन किलोमीटर दूर हैं कार्यालय
जिला सचिवालय से दूर करीब दस सरकारी कार्यालय हैं, जिनमें आंगनबाड़ी, अनुसूचित जनजाति, माइनिंग, विजिलेंस, होमगार्ड, शिक्षा, सेंट्रल आईबी व महिला बाल विकास निगम हैं। इनके कार्यालय मिनी सचिवालय से करीब दो से तीन किलोमीटर दूर होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मिनी सचिवालय में सभी सरकारी कार्यालयों को एक छत के नीचे लाने के लिए तत्कालीन उपायुक्त अजय कुमार के साथ बैठक की थी। लेकिन मिनी सचिवालय में सभी कार्यालय एक जगह करने में पर्याप्त कमरे नहीं हैं। मनोज कुमार, एसडीएम, नारनौल।