नारनौल। जहां अधिकांश लोग बढ़ती उम्र को अपने सपनों की राह में बाधा मान लेते हैं। वहीं, गांव चामधेड़ा की सुशीला देवी (63) ने यह साबित कर दिया कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर उदाहरण प्रस्तुत किया है।
सुशीला देवी, गांव चामधेड़ा निवासी बाबूलाल की पत्नी व पूर्व सरपंच विष्णु डाबड़ की माता हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों और घरेलू कार्यों के कारण वे बचपन में अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकी थीं। हालांकि शिक्षा प्राप्त करने की उनकी इच्छा हमेशा जीवित रही। परिवार के प्रोत्साहन और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय के माध्यम से दोबारा पढ़ाई शुरू की और दसवीं की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली।
परिणाम घोषित होने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। पूर्व सरपंच विष्णु डाबड़ ने बताया कि उनकी माता की पढ़ाई पूरी करने की इच्छा लंबे समय से थी। परिवार ने उन्हें प्रोत्साहित किया और उन्होंने पूरे समर्पण के साथ तैयारी कर परीक्षा पास की। यह उपलब्धि पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है। सुशीला देवी ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग और अपनी निरंतर मेहनत को दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन को नई दिशा देती है और हर व्यक्ति को सीखते रहने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने महिलाओं और बुजुर्गों को संदेश देते हुए कहा कि यदि किसी कारणवश पढ़ाई अधूरी रह गई हो तो उसे पूरा करने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए।