फोटो संख्या:71- सीहमा के निजी स्कूल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण-सुदामा मित्र
महेंद्रगढ़। सिहमा के निजी स्कूल में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण-सुदामा चरित्र, सुकदेव की वापसी की कथा सुनाई गई।
कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण सुदामा की मित्रता की झांकी दिखाई गई। पंडित कुलदीप भारद्वाज ने कहा कि भागवत महापुराण में सुदामा का कहीं नाम नहीं है बल्कि सखा नाम आया है। मित्र बहुत होते हैं पर सखा एक ही होता है। भिक्षुक बन कर भगवान कृष्ण के यहां भिक्षा मांगने द्वारिका पहुंचे सुदामा की कोई कामना नहीं थी।
केवल एक ही भाव था कि सखा से मिलना है। सुदामा निष्काम थे, इसलिए प्रभु श्रीकृष्ण ने बिना मांगे अपने समान धन संपत्ति उन्हें दी। पत्नी सुशीला ने भगवान श्री कृष्ण के पास सुदामा से चार मुट्ठी ही चावल भेजे थे। तीन या पांच मुट्ठी क्यों नहीं भेजे, इसका रहस्य बताते हुए उन्होंने कहा व्यक्ति के जीवन में चार ही वस्तुओं धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की आवश्यकता होती है।
जो ईश्वर में आस्था रखता है वही सुदामा है और ईश्वर की तरफ भेजने वाली बुद्धि सुशीला है। इसलिए सभी को भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। कथा के आगे उन्होंने भक्ति में प्रथम अक्षर भ का महत्व बताते हुए कहा कि हमारे देश का नाम भारत, शरीर स्वस्थ रहने के साधन का नाम भोजन, भगवान के नाम का प्रथम अक्षर और इसे पाने के लिए भक्ति में भी भ अक्षर का ही वर्चस्व है। इस मौके पर अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।