महेंद्रगढ़। वर्तमान में तनाव से ज्यादातर लोग परेशान हैं। इसका शारीरिक, मानसिक सेहत पर गहरा पड़ता है।
योग और आयुर्वेद का संयोजन योगायु लाइफ फाउंडर और मानसिक रोगों के विशेषज्ञ डॉ. निलेश मुदगल ने बताया कि तनाव आधुनिक जीवनशैली की वो विरासत है। इसे हमने व्यस्तता, प्रतिस्पर्धा, असुरक्षा और असंतुलित दिनचर्या से अनजाने में स्वीकार कर लिया है। तनाव का कोई एक रूप नहीं होता। यह एक छात्र की परीक्षा से पहले की घबराहट हो सकती है। एक महिला की दिनभर के कार्यों के बीच खुद को खो देने की अनुभूति हो सकती है।
डॉ. निलेश ने बताया कि शारीरिक स्तर पर तनाव से अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, थकान, पाचन विकार और प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी हो सकती है। मानसिक रूप से यह चिंता, अवसाद, चिड़चिड़ापन, निर्णय लेने की क्षमता में कमी और संबंधों में कटुता लाता है। शिथिलता अभ्यास, शवासन, मकरासन, बालासन, शशांकासन आदि योग प्राणायाम से तनाव दूर हो सकता है।
अनुलोम-विलोम-नाड़ी संतुलन, भ्रामरी – तंत्रिका तंत्र को शांत करता है। चंद्र भेदन मानसिक ठंडक लाने में सहायक होते है। बढ़ा हुआ तनाव कम करने में योग कारगर है। कई शोध इस बात पर सहमति जताते हैं। कई योग आसन हैं, जो तनाव दूर कर व्यक्ति को मानसिक स्तर पर स्वस्थ बनाते हैं।
इंसेट
तनाव दूर करने के लिए यह तरीके कारगर
ओंकार जप, सरल ध्यान, श्वसन ध्यान, योगनिद्रा, विपश्यना, मुद्राएं, ज्ञान मुद्रा, चिन्मय मुद्रा, योग निद्रा सोने से पहले मानसिक शांति देने वाला अमूल्य अभ्यास है। योग करने से मनुष्य का शरीर स्वस्थ रहता है। इसके साथ-साथ अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। सुबह शाम के समय प्रतिदिन योग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तनाव को हराने का मतलब केवल आराम नहीं, बल्कि मन स्थिति में बदलाव है। मोबाइल समय सीमित करें। प्रकृति से जुड़ाव बढ़ाएं, ना कहने की आदत विकसित करें गहरी सांसों की आदत डालें। नियमित योग अभ्यास को जीवन का हिस्सा बनाएं। तनाव से पूरी तरह मुक्ति संभव है, यदि हम शरीर और मन दोनों को साथ लेकर चलें। योग न केवल शरीर को लचीलापन देता है, बल्कि मन को सहनशीलता और विवेक भी देता है।