फोटो 07 हुडा सेक्टर में विचरते गोवंश। संवाद
नारनौल। शहर में आवारा घूमते गोवंश को पकड़ने के दावे कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं। इसी का परिणाम है कि आवारा गोवंश सड़कों पर झुंड में विचरण करते नजर आ रहे हैं। कोहरे में आवारा गोवंश हादसे का सबब भी बन जाते हैं। ऐसे में जानवर तो घायल होता ही है, साथ ही वाहन चालक के भी घायल होने की संभावना बनी रहती है।
शहर में यहां वहां विचरते गोवंश में लंपी नामक संक्रमण भी फैलने लगा है और इसकी रोकथाम के लिए पशु चिकित्सकों की टीम ने दो तीन दिन तक शहर में दौरा कर इन गोवंशों की जांच भी की थी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने तो अपनी मुस्तैदी दिखाई लेकिन नप अभी तक कछुआ चाल ही चल रहा है।
पशु चिकित्सक की माने तो सर्दी के मौसम में खासकर सांड, गर्मी की तुलना में अधिक उत्तेजित व आक्रामक हो जाते हैं। ऐसे में सांड आपस में भिड़ जाते हैं और उनकी भिड़ंत का खामियाजा अक्सर आमजन को भुगतना पड़ता है।
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घर के अंदर गाड़ी खड़ी करने की जगह न होने के चलते सड़क किनारे ही खड़ी करनी पड़ती है। एक दिन दो सांड आपस में भिड़ गए और मेरी गाड़ी का बोनट व सामने वाला कांच तोड़ दिया। इसके अलावा पड़ोसी की स्कूटी भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। -मुकेश सैनी, स्थानीय निवासी
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पिछले साल घर का निर्माण चल रहा था। नींव भरने के बाद चहारदीवारी खड़ी कर दी गई थी। गोवंशों की लड़ाई में दो तरफ की पूरी दीवार गिर गई और फिर से दीवार बनवानी पड़ी। ऐसे में दोहरी चपत लग गई।-रतन सिंह, स्थानीय निवासी
वर्जन:
गोवंशों को पकड़ने का कार्य चल रहा है। इसके बावजूद अगर गोवंश आवारा घूम रहे हैं तो उन्हें जल्द ही पकड़ा जाएगा।-कमलेश सैनी, चेयरपर्सन, नप, नारनौल