फोटो संख्या:65- गांव धनौंदा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा का रसपान करते श्रद्धालु--स्रोत-
कनीना। गांव धनौंदा में महाजन चौक पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन राजा परीक्षित जन्म की कथा सुनाई। कथावाचक भागवत आचार्य कृष्ण किशोर दास प्रभु ने कहा कि जन्म-जन्मांतर और युग-युगांतर में जब पुण्य का उदय होता है, तब ऐसा अनुष्ठान होता है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से पापी भी पाप मुक्त हो जाते हैं। वेदों का सार युगों-युगों से मानवजाति तक पहुंचाता रहा है।
भागवत पुराण उसी सनातन ज्ञान प्रवाह है जो वेदों से प्रवाहित होती चली आई है। इसलिए भागवत महापुराण को वेदों का सार कहा गया है। उन्होंने कहा कि युद्ध में गुरु द्रोण के मारे जाने पर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया। वहीं दूसरी ओर अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ। आयोजन समिति के सदस्य राजकुमारी बाबूलाल गोयल ने बताया कि सात दिनों से भागवत कथा के बाद सोमवार को हवन यज्ञ किया जाएगा। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कार्यक्रम किया जाएगा। इस अवसर पर ठाकुर रतन सिंह, कैलाश गोयल, विजय आर्य, ठाकुर कर्मवीर सिंह, वीर सिंह सरपंच, सुनील सेठ, दीपांशु तंवर सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।