फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि की वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों ने देश-विदेश में लहराया परचम

विज्ञापन
फोटो संख्या:88- हकेंवि में बायोटेक्नोलाॅजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. नम्रता ढाका
विज्ञापन
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की महिला वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं ने देश के अलावा अपनी प्रतिभा का विदेशों तक लौह मनवाया है। महिला वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं ने अपनी प्रतिभा के दम पर न केवल देश में बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान बनाई है। इन महिला वैज्ञानिकों ने विभिन्न शोध परियोजनाओं, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और वैज्ञानिक पत्रिकाओं में महत्वपूर्ण योगदान से विश्वविद्यालय और देश का नाम रोशन किया है।
विज्ञापन

-
सहायक प्रो. नम्रता ढाका को बेस्ट रिसर्चर अवॉर्ड
हकेंवि के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नम्रता ढाका को साइंस और इंजीनियरिंग स्ट्रीम में बेस्ट रिसर्चर (प्रोजेक्ट्स) अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की प्रतिष्ठित इनोवेटिव यंग बायोटेक्नोलॉजिस्ट फेलोशिप के तहत 61.82 लाख रुपये का रिसर्च ग्रांट मिला है। यह ग्रांट ज्वार में बीज के विकास पर शोध के लिए दिया गया है। डॉ. ढाका हकेंवि में सीड ओमिक्स लैब की प्रमुख हैं। उनका शोध फसलों के बीज के गुणों के जेनेटिक आधार को समझने में मदद करेगा और सरसों व ज्वार की पैदावार व गुणवत्ता सुधारने में ब्रीडर्स के लिए उपयोगी साबित होगा

डॉ. मनीषा को मिला नवाचार में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार
हकेंवि के औषधी विज्ञान विभाग की प्रो. डॉ. मनीषा पांडेय को 2026 में हकेंवि में नवाचार विज्ञान शिक्षण में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिला। डॉ. मनीषा के पास 176 प्रकाशनों, 30 शोध परियोजनाओं और सात हजार से अधिक उद्धरणों (एच-इंडेक्स 49) सहित महत्वपूर्ण शोध उपलब्धियां हैं। उनका कार्य नवीन औषधि वितरण प्रणालियों, नैनो तकनीक और कैंसर उपचार पर केंद्रित है। डॉ. मनीषा पांडेय को 2021 से 2025 तक प्रतिवर्ष स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में सूचीबद्ध किया गया है। वर्ष 2026 में अनुसंधान सहयोग के लिए अनुसंधान पुरस्कार मिला।
विज्ञापन


डॉ. अनिता ने शोध से कचरी को दिलाई पहचान
हकेंवि के पोषण जीवविज्ञान विभाग की डॉ. अनीता कुमारी ने कचरी की पोषण संबंधी, चिकित्सीय और कार्यात्मक क्षमता का पता लगाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पोषण संबंधी खतरों को कम करने व उपयोग को बढ़ाने के लिए उत्पाद विकसित करना है। शोध निष्कर्षों के आधार पर, कचरी के गूदे, बीज के आटे और पत्तों के आटे का उपयोग करके कई नवीन कार्यात्मक खाद्य उत्पाद विकसित और मानकीकृत किए गए जिनमें सिरप, स्प्रेड, रेडी-टू-सर्व (आरटीएस) पेय, पिन्नी और हर्बल चाय शामिल हैं।

डॉ. नीलम की खोज से कम खर्च में कैंसर की जांच
हकेंवि के जैव रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. नीलम को महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का लगाने के लिए 60.37 लाख रुपये का अनुदान मिला है। विश्वविद्यालय के जैव रसायन विभाग ने ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) की पहचान के लिए एक अल्ट्रासेंसिटिव बायो सेंसर बनाने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया है। इस शोध में सात शिक्षकों और शोधार्थियों की टीम काम कर रही है। इसके शुरुआती चरण में नैनो कणों का सफल निर्माण कर लिया है। यही कण बायो सेंसर के मुख्य हिस्से के रूप में एचपीवी वायरस (टाइप 16 और 18) को पहचानने में मदद करेंगे। डॉ. नीलम की टीम द्वारा शुरू किया गया है यह शोध बायो सेंसर एक पोर्टेबल और सस्ता जांच उपकरण होगा जो बिना किसी चीरफाड़ के सर्वाइकल कैंसर के इलाज में सहायक होगा।

फोटो संख्या:88- हकेंवि में बायोटेक्नोलाॅजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. नम्रता ढाका

फोटो संख्या:88- हकेंवि में बायोटेक्नोलाॅजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. नम्रता ढाका

फोटो संख्या:88- हकेंवि में बायोटेक्नोलाॅजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. नम्रता ढाका

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें