नारनौल। शारदा संस्कृत महाविद्यालय ने शनिवार को महर्षि च्यवन की तपोस्थली ढोसी धाम के शिवकुंड पर विप्रजनों ने श्रावणी उपाकर्म मनाया।
श्रावणी उपाकर्म महाविद्यालय के आचार्य देवदत्त शास्त्री के सानिध्य में आयोजित किया गया, जबकि आचार्य क्रांति निर्मल ने वेद मंत्रों के साथ इस पूरे कार्यक्रम को संपन्न करवाया। विप्रजनों ने शिवकुंड में खड़े होकर जलक्रिया के दौरान वेद मंत्रों के द्वारा सभी नदियों का आह्वान कर ऋषि तर्पण व पितृ तर्पण किया।
इसके बाद ब्राह्मणों ने वहीं मंदिर में सप्त ऋषियों का पूजन व हवन कर नए यज्ञोपवीत धारण किए। कार्यक्रम में बतौर यजमान गौड़ सभा के पूर्व प्रधान शिव कुमार मेहता, सह सचिव हेमंत भारद्वाज सिहमा, कार्यकारिणी सदस्य अमित पांडे व मनीष वशिष्ठ आदि ने शिरकत की। महाविद्यालय के 11 नए ब्रह्मचारियों को यज्ञोपवीत धारण कराया गया। आचार्य क्रांति निर्मल ने कहा कि आज श्रावणी पर्व ब्राह्मणों का सबसे बड़ा पर्व है।
उन्होंने कहा कि इस दिन सभी देवताओं व सप्त ऋषियों का पूजन करते है और अपनी शुद्धि करते हैं। आचार्य ने कहा कि आज संस्कृत दिवस भी है। संस्कृत देववाणी है। इसलिए ब्राह्मणों काे इसका ज्ञान होना चाहिए। आने वाली पीढ़ी को संस्कार देने व सनातन धर्म को बचाए रखने के लिए इस तरह के आयोजन की आवश्यकता है।
इस मौके पर हंसराज मेहता, देशराज मेहता, महेश मेहता, नागेंद्र दत्त शर्मा, गोपाल शास्त्री, राजेश बोहरा शास्त्री, रविंद्र शास्त्री, आचार्य बजरंग शास्त्री, रविंद्र शास्त्री, दीपक शास्त्री, मनोज शास्त्री आदि मौजूद थे।