प्रदेश सरकार भले ही पर्ची-खर्ची खत्म होने का दावा कर रही हो, लेकिन महेंद्रगढ़ तहसील तथा पटवारघरों में हकीकत कुछ और ही है। यहां आने वाले लोगों ने आरोप लगाया कि उनके काम करवाने के लिए अधिक पैसा लिया जा रहा है।
लोगों ने आरोप लगाय कि सरकार की ओर से निर्धारित जमाबंदी का सत्यापन, इंतकाल दर्ज करना, इंतकाल की नकल, ततीमा बनाने, काश्तकारी की नकल आदि की सरकार की ओर से निर्धारित फीस से कई गुना ज्यादा ली जाती है। फीस की रसीद काटकर भी लोगों को नहीं दी जाती है। जिन कार्यों की फीस नहीं लगती उनके भी 200 से 250 रुपये की वसूली की जाती है।
इस मामले की जब पड़ताल की गई तो पटवारघरों में कहीं भी न तो रेट लिस्ट लगी थी और न ही लोगों को फीस की रसीद काटकर दी जा रही थी। जब इस संबंध में पटवारियों से पूछा गया तो कुछ ने तो बताया कि रेट लिस्ट छपने के लिए दी गई है तो कुछ ने कहा कि तहसील में प्रदर्शित की गई है। लेकिन तहसील में इंतकाल दर्ज करने को छोड़कर उपरोक्त कार्यों में से किसी भी कार्य की फीस प्रदर्शित नहीं की गई है। संवाद
पटवारियों के पास नहीं मिली रसीद बुक
मोहल्ला महायचान के चार-पांच पटवारघरों में जाकर पड़ताल की तो किसी में भी रसीद बुक नहीं मिली। पटवारियों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कार्यालय से उनको रसीद बुक जारी ही नहीं की गई है। उपरोक्त कार्यों की फीस लेकर वो उजरत रजिस्टर में चढ़ा देते हैं। इन पटवार घरों में रेट लिस्ट भी नहीं लगी हुई थी। इस प्रकार पटवारी फीस के नाम पर लोगों से काफी ज्यादा रुपये लेते हैं। इतना ही नहीं पटवारियों ने अपना एक-एक अस्सिटेंट भी रखा हुआ है, जो अनधिकृत रूप से उनका काम करते हैं। अधिकांश पटवारी इन्हीं के माध्यम से खर्ची लेते हैं।
खरीदी हुई जमीन का इंतकाल दर्ज करवाने की पटवारी को नहीं देनी होती फीस
खरीदी हुई जमीन की रजिस्ट्री के समय इंतकाल की फीस जमा हो जाती है। रजिस्ट्री की एक कॉपी खरीदार को, दूसरी रिकॉर्ड रूम में तथा तीसरी संबंधित हलके के पटवारी के पास पहुंच जाती है। पटवारी को अपने रिकॉर्ड में यह इंतकाल दर्ज करना होता है। इस इंतकाल की कोई फीस नहीं देनी पड़ती है और न ही भू स्वामी को उसके पास आने की जरूरत होती है।
आरटीआई में नहीं दिया जवाब
इस मामले में एक जागरूक व्यक्ति ने आरटीआई भी लगाई थी और सीएम विंडो पर भी शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन उसमें भी राजस्व विभाग ने कोई संतोषनक जवाब नहीं दिया। विभाग ने अपने जवाब में लिखा कि फीस रेट लिस्ट तहसील परिसर तथा सभी पटवार घरों में प्रदर्शित की गई है। सभी पटवारी वसूले गए शुल्क की रसीद देते हैं तथा निर्धारित शुल्क से ज्यादा पटवारी शुल्क नहीं ले रहा।
ये है फीस:
इंतकाल की नकल की फीस : 25 रुपये प्रति पेज
विरासत का इंतकाल दर्ज करवाने की फीस: 300 रुपये (250 रुपये रिवन्यू + 50 रुपये प्रोसेसिंग चार्ज)
गिरदावरी या काश्तकारी की नकल की फीस : किला नंबर 20 तक केवल 10 रुपये और इसके बाद प्रति पांच किला नंबर तक (ब्लॉक) 2 रुपये
-जमाबंदी का हलका पटवारी सत्यापन फीस: 10 रुपये प्रति खतौनी पांच खतौनी तक, इसके बाद पांच रुपये प्रति खतौनी चार्ज होते हैं।
बैंक इत्यादि से ऋण लेकर जमीन आड़ रहण की पटवारी रजिस्टर में इंट्री की कोई फीस नहीं होती।
बैंक में पूरा ऋण चुका देने के बाद जमीन आड़ रहण को फक (रिलीज ऑर्डर) की कोई फीस नहीं होती।
फर्द बदर (पटवारी के रिकॉर्ड में जमीन मालिकों नाम व अन्य विवरण को दुरुस्त) करवाने की कोई फीस नहीं होती।
रोजनामचा नकल: 10 रुपये प्रति रिपोर्ट नंबर
कृषि भूमि पर स्थित मकान या ट्यूबवेल इत्यादि से संबंधित नक्शा (ततीमा) बनाने की फीस 3 किला नंबर तक केवल 5 रुपये, इसके बाद प्रति किला नंबर 2 रुपये।
मैं पटवारी के पास इंतकाल दर्ज करवाने के लिए 2-3 बार चक्कर लगा चुका हूं। पटवारी कभी मिलती नहीं है। उसने एक सहायक रखा हुआ है। वह भी मिलता नहीं और मिलता है तो रिश्वत की मांग करता है। रामपाल यादव
मैंने आरटीआई और सीएम विंडो में शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन उस पर कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए मैंने पुन: सीएम विंडों पर शिकायत दर्ज करवाई है। मुख्यमंत्री से पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करने की अपील की है। राजस्व विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार की सतर्कता एजेंसी से जांच करवाने की मांग भी की हैै। अशोक यादव, पल्ह।
सरकार के आदेश हैं कि जो भी शुल्क लिया जाता है उसकी रसीद अवश्य दी जाए और कार्यालयों में रेट लिस्ट भी प्रदर्शित होनी चाहिए। इस मामले में तहसीलदार से बातचीत की जाएगी और उनको रेट लिस्ट लगवाने के आदेश दिए जाएंगे। -दिनेश कुमार, एसडीएम।