मंडी अटेली। स्वस्थ भारत मिशन के तहत क्षेत्र के विभिन्न गांव में सार्वजनिक शौचालय बनवाए गए थे। इस पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में शौचालय खंडहर होते जा रहे हैं।
11,800 रुपये एक शौचालय के निर्माण में खर्च हुए थे। खंड विकास और पंचायत कार्यालय की ओर से क्षेत्र के 27 गांवों में 110 शौचालयों का निर्माण करवाया गया। इस पर सरकार की ओर से लगभग 13 लाख रुपये की लागत लगी थी, लेकिन एकाध गांव को छोड़कर लगभग सभी शौचालय नागरिकों को सुविधा देने में नकारा साबित हो चुके हैं।
शौचालयों के आसपास गंदगी के ढेर जमा हो रहे हैं। पानी की व्यवस्था भी नहीं है। साथ में दरवाजे भी टूट चुके हैं। ऐसे हालात में सरकार की लाखों रुपये के राशि चंद वर्षों में ही मिट्टी में मिलती नजर आ रही है। सबसे बुरा हाल पंचायती कार्यकाल समाप्त होने के कारण सार्वजनिक शौचालयों और उनकी सफाई पर पड़ा है। जिससे साफ सफाई की व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्र में पूर्ण रूप से चरमराई हुई है।
सफाई कर्मचारी पंचायत का भय न होने के कारण मनमर्जी से कार्य कर रहे हैं। इसका खामियाजा ग्रामीण लोगों को उठाना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में जगह-जगह कूड़े के ढेर व पानी निकासी की नालियां गंदगी से अटी पड़ी है। लेकिन इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
इंसट
किस गांव में कितने हैं सार्वजनिक शौचालय
बजाड़, घड़ी रुथल, हसनपुर व कारिया में दस-दस, बाछौद, गणियार, चंद्रपुरा, कटकई, खेड़ी, खारीवाड़ा, खोड व महासर में दो-दो, भीलवाड़ा व गुजरवास में चार-चार, बौचडिया व काटी में पांच-पांच, मोहनपुर में 6 तथा तिगरा में 8 तो बिहाली, नांगल, राता कला, राता खुर्द, फतेहपुर, सैदपुर, मोहल्ड़ा व तोबड़ा में तीन-तीन सार्वजनिक शौचालय बनाए गए थे, लेकिन अनदेखी से शौचालय खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं।
वर्जन:
सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण आम नागरिक के लिए किया गया था, ताकि गांव को ओडीएफ घोषित किया जा सके। जहां तक शौचालयों की दुर्दशा की बात है तो यह मामला संज्ञान में नहीं आया था। फिर भी इस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शौचालयों का लाभ आम नागरिक को मिलना चाहिए।-मोनिका सैनी, ब्लाक कोओर्डिनेटर, बीडीपीओ कार्यालय, अटेली नांगल