फोटो संख्या:63- कनीना में पशु की जांच करता चिकित्सक डॉ. पवन --संवाद
कनीना। पशुओं को भी गर्मी और लू से बचाना चाहिए। पशुओं पर भी मौसम का प्रभाव पड़ता है। यदि पशुओं को गर्मी से नहीं बचाते हैं तो दूध की मात्रा घटती चली जाती है।
जिस प्रकार सर्दी से और गर्मी से इंसान बचता है, असी प्रकार पशुओं को भी बचाना पड़ता है। पशुओं को विशेषकर भैंस को अधिक गर्मी लगती है। जब गर्मी बढ़ती चली जाती है तो उस समय पशु हांफने लगते हैं। हालात यह होती है कि शाम के समय तापमान अधिक होता है, जिससे पशु चारा चरना कम कर देता है और दूध भी कम हो जाता है। ऐसे में पशुओं को भी गर्मी और सर्दी दोनों तापों से बचना जरूरी होता है।
राजकीय पशु चिकित्सालय के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डाॅ. पवन कांगड़ा ने बताया कि शाम को तापमान अधिक रहता है। इसके कारण पशु चारा चरना काम कर देते हैं। दूध की मात्रा 50 प्रतिशत तक काम हो जाती है। ऐसे में पशुपालक प्रतिदिन पशुओं को एक निश्चित समय पर चारा डालने की आदत को भुला देना चाहिए और सोते समय पशुओं के लिए चारा डाल देना चाहिए। पशुओं को ठंडे एवं छायादार पेड़ के नीचे बांधना चाहिए। हो सके तो कूलर और पंखों का भी प्रबंध पशुओं के लिए करना चाहिए। सुबह और शाम दो बार पशु को नहलाना चाहिए।
इंसेट
घटने लगा है जोहड़ों में पानी की मात्रा
गर्मी में जोहड़ों और तालाबों में ग्रामीण पशुओं को पानी पिलाने के लिए ले जाते हैं, लेकिन तालाबों में जल की मात्रा घटती जा रही है। पशुधन के लिए भी पानी की मात्रा घटती जा रही है। एक और जहां गर्मी के दिनों में सुबह-शाम पशुओं को जोहड़ में छोड़ देना चाहिए, जिससे पशु का तापमान कम हो जाता है और पशु दूध देने की मात्रा फिर से बढ़ जाती है।