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आंगनबाड़ी कार्यकर्तांओं की हड़ताल के कारण गर्भवती महिलाओं और बच्चों को नहीं मिल पा रहा पोषाहार

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मांगों को लेकर धरना देतीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका । संवाद - फोटो : Narnol
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की हड़ताल के कारण गर्भवती महिलाओं और बच्चों को दो माह से पोषाहार नहीं मिल पाया है। इसके चलते गर्भवती महिलाओं और बच्चों को कुपोषण का शिकार होना पड़ रहा है। पोषाहार विभाग के पास आया हुआ है, लेकिन हड़ताल के कारण आंगनबाड़ी कार्र्यकर्ताओं द्वारा उसे वितरित नहीं किया जा रहा है।
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बता दें कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और छह वर्ष तक के बच्चों को चावल, गेहूं, चीनी, चना, मुरमुरा, मूंगफली, सोयाबीन, चना दाल व भुना हुआ चना आदि पोषाहार के रूप में दिया जाता है, ताकि उनको कुपोषण का शिकार होने से बचाया जा सके। विभाग की इस योजना के लिए जिले में 1201 आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों पर 1128 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 1058 सहायिका काम करती हैं। 38 सुपरवाइजर की भी नियुक्ति की गई है। कार्यकर्ता और सहायिका पर ही गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों का समय-समय पर टीकाकरण करवाने की जिम्मेदारी होती है। मगर उनके हड़ताल पर होने की वजह से उक्त सभी कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं।
सुपरवाइजरों ने किए हाथ खड़े
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल के कारण बच्चों व महिलाओं को पोषाहार सुपरवाइजरों के माध्यम से वितरित करने का विभाग दिया गया है। मगर राशन वितरित करने में सुपरवाइजरों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। उन्होेंने सीडीपीओ के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजकर बिना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्थ के वितरण नहीं करने की बात कही है। इस प्रकार महिलाओं व बच्चों को अभी कुछ दिन और पोषाहार नहीं मिल पाएगा।
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विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को पोषाहार वितरित किया जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की हड़ताल के चलते पोषाहार वितरित नहीं हो पाया है। पोषाहार वितरण का कार्य सरकार के आदेशानुसार किया जाएगा। संगीता यादव, सीडीपीओ, नारनौल।
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