शहर से करीब दस किलोमीटर दूर गांव सूरजनवास। पांच साल पहले घर घर में पानी पहुंचाने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा पानी की टंकी बनाई गई व गहरे तालाब बनाए गए। लोगों को बड़ी उम्मीद थी कि अब पानी की प्यास नहीं रहेगी, हुआ भी ऐसा ही। इसके विपरित जो ग्रामीणों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था, वो होने लगा। तालाब चिराग बुझाने लगा। पांच साल में यह तालाब चार जान ले चुका है। मंगलवार को तालाब ने एक और युवक को आगोश में ले लिया।
मामले के अनुसार, गांव सुरजनवास निवासी सुशील (25) एमए में पढ़ता था और अपने परिवार में इकलौता लड़का था। मंगलवार सुबह छह बजे वह घर से चूहा पकड़कर उसे बाहर छोड़ने के लिए गया। चूहा छोड़ने के बाद वह हाथ धोने के लिए पानी के तालाब के पास गया तो उसका फिसलन होने के कारण उसका पैर फिसल गया और वह सीधे तालाब में जा गिरा।
गिरने से उसका सिर लग गया, जिससे वह पानी में डूब गया। आठ बजे तक सुशील के नहीं आने पर परिजनों ने उसकी तलाश की तो तालाब में उसकी चप्पल तैरती हुई मिली। डूबने की आशंका के चलते ग्रामीणों ने तालाब में उसकी तलाश की तो सुशील मिल गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। आनन फानन में उसे सामान्य अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है।
अच्छा तैराक था सुशील
सुशील के परिजन महेश कुमार ने बताया कि सुशील कुमार अच्छा तैराक था, वह गांव के तालाब को कई बार पार कर देता था, लेकिन किसी भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह पानी में ही डूब जाएगा। फिलहाल वह घर पर खेती में अपने पिता ब्रह्मप्रकाश हाथ बंटाता था और राजस्थान की एक यूनिवर्सिटी से पत्राचार से एमए की पढ़ाई कर रहा था। सुशील अपने परिवार में अकेला लड़का था, उसकी दो बहनें हैं। पत्नी के अलावा उसके पास भी दो नन्ही बेटियां हैं। फिलहाल घर में व गांव में सुशील की मौत से मातम का माहौल बना हुआ है।
चार मौतों से ग्रामीणों में है रोष
उधर, तालाब में डूबने से हो रही लगातार मौतों से ग्रामीणों में विभाग के प्रति रोष भी है। ग्रामीणों ने बताया कि इससे साल पहले गांव के ही युवक राहुल, एक पांच साल की बच्ची की डूबने से मौत हुई थी। गांव खेड़ा का भी एक व्यक्ति तालाब में फिसलने से डूब गया था। ग्रामीणों ने मांग की है कि इसके चारों ओर चारदीवारी बनाई जाए, साथ ही तालाब के अंदर जाने वाले रास्ते पर जाली लगवाई जाए, ताकि गांव के बच्चे यहां न जा सकें। ग्रामीणों ने चेताया है कि अगर जल्द ही तालाब के पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो वे यहां पर तालाबंदी कर देंगे।
तालाब में घास का कब्जा, नहीं होती सफाई
तालाब में काई जम चुकी है और उसके अंदर इतनी लंबी व गहरी घास जमी हुई है कि अगर एक बार कोई व्यक्ति तालाब के अंदर चला गया तो वह आसानी से बाहर नहीं निकल सकता। घास व काई होने के कारण तालाब की दीवारों पर फिसलन बनी हुई है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि विभाग द्वारा तालाब की सफाई नहीं कराई जाती, अगर घास न होती तो सुशील की जान बच सकती थी।
तालाब के पास जाना है अपराध : जेई
इस बारे में जनस्वास्थ्य विभाग के जेई गजराज का कहना है कि पानी की टंकी व तालाबों के चारों तरफ चारदीवारी है। इसमें घुसना अपराध है, बावजूद इसके ग्रामीण यहां पर घुसते हैं, जो गलत है। तालाबों के पास नहीं जाने को लेकर गांवों में बकायदा मुनादी कराई गई है। जहां तक पानी के टैंक के पास जाली लगाने की बात को लेकर अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।