खारकीव बंकरों से निकालने के लिए मंगलवार को स्पेशल ट्रेन चलाई गई है। यह ट्रेन खारकीव से ल्वीव तक जाएगी। इसी गाड़ी में सवार होकर अटेली नांगल निवासी पीयूष आ रहा है। वह वहां मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था लेकिन अब डर इस बात का है कि यह गाड़ी कीव होते हुए आएगी। कीव में इस समय भारी गोलाबारी चल रही है। यह ट्रेन उनको ल्वीव उतारेगी। स्पेशल ट्रेन चलने से पीयूष के माता पिता को हलकी सी राहत मिली है। मंगलवार को प्रशासन की ओर से दो गिरदावर भी उनके घर पर पहुंचे थे और उन्होंने हालचाल जाना। वहीं कनीना निवासी आदित्य वर्मा सोमवार रात रोमानिया बॉर्डर पहुंच गया है और बुधवार को वह भारत लौट आएगा।
बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग में अटेली नांगल का एक मेडिकल का छात्र पीयूष भी फंसा हुआ है जिसकी सलामती के लिए परिजन काफी चिंतित हैं। यूक्रेन में फंसे मेडिकल छात्र पीयूष के पिता सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनका बेटा खारकीव में मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। अभी वह तीसरे सेमेस्टर में है। पिता ने बताया कि पीयूष से शाम को फोन पर बातचीत हुई थी। तब उसने बताया कि वह गाड़ी सवार हो गया है। मंगलवार को स्पेशल गाड़ी खारकीव से लीव तक चलाई गई है। इस गाड़ी में 4 हजार भारतीय छात्र सवार हैं और कीव होते हुए लगभग लीव पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि स्पेशल गाड़ी चलाने से उनको हलकी राहत मिली है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई कि वो किसी भी तरीके विद्यार्थियों को वहां से निकाल ले।
बेटे की सलामती की दुुआ कर रहे
पिता सुरेंद्र ने बताया कि पूरा परिवार भगवान की शरण में बैठकर बेटे की सलामती की दुुआ कर रहे हैं। मंगलवार को परिवार के सदस्यों ने महाशिवरात्रि का व्रत भी रखा है। पिछले तीन चार दिनों से मां की आंखों का पानी नहीं सूख पा रहा है वह अपने बेटे का हर पल इंतजार कर रही है। वहीं पिता का भी कोई काम करने का मन नहीं है। परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है कि उनके बेटे का सही सलामत घर पर वापस लौटा दे।
25 फरवरी की करवाई टिकट बुक
पिता सुरेंद्र ने बताया कि दूतावास की ओर एडवाइजरी जारी करने के बाद उसके लिए 19 फरवरी को 25 फरवरी के लिए टिकट बुक करवाया था और 24 फरवरी की सुबह वह निकलने वाला ही था कि यूक्रेन की सुबह पांच बजे रूस ने हमला कर दिया। इसके बाद वहां की उड़ानें रद्द हो गई तथा टिकट को रद्द करवानी पड़ी।
पहले बंकरों में बिताए दिन रात, अब 20 किलोमीटर चलना पड़ेगा पैदल
पिता सुरेंद्र ने बताया कि भारत के लगभग 30 विद्यार्थी खारकीव मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे हैं। खारकीव में गोला बारी अधिक होने की वजह से विद्यार्थियों को बंकरों में रखा गया था। दिन रात उनको वहीं बितानी पड़ रही थी। कुछ समय के लिए ही वो अपने फ्लेट पर जाते हैं। जैसे ही सायरन बजता है तो लौटकर बंकर में ही आ जाते थे। खाना तो दूर की बात बच्चों को जान बचाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि पहले बंकरों में दिनरात बिताई अब ल्वीव उतरने के बाद उनको लगभग 20 किलोमीटर पैदल चलना पड़ेगा, उसके बाद एक निर्धारित लोकेशन पर पेट्रोल पंप के पास भारतीय दूतावास की बसें मिलेंगी। बसों के द्वारा वो बुद्धादेव बॉर्डर के पास पहुंचेंगे। उसके बाद वो एयर पोर्ट के लिए रवाना होंगे। उन्होंने बताया कि अभी उसको घर पहुंचने में दो दिन का समय लग सकता है।
खाने-पीने एवं रहने की है पूरी व्यवस्था, आज पहुंचेगा आदित्य वर्मा
सोमवार की रात 11 बजे (यूक्रेन समय रात 8 बजे) रोमानिया बॉर्डर पहुंचे कनीना निवासी आदित्य वर्मा से फोन पर बातचीत की गई। आदित्य ने बताया कि अब वह सुरक्षित स्थान पर है और रात 8 बजे वह रोमानिया बॉर्डर पहुंच गया था। खाने-पीने एवं रहने की अच्छी व्यवस्था की गई है। किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है। एक बड़े हॉल में ठहराया गया है जहां पर सोने के लिए गद्दे एवं खाने पीने का सामान दिया जा रहा है। उसने बताया कि यहां के नागरिक बहुत अच्छे हैं। भारतीय विद्यार्थियों की काफी मदद कर रहे हैं। उसने बताया कि अभी यहां काफी भीड़ हैं। मंगलवार की रात को वह बुच्चारेस्ट एयरपोर्ट पहुंच जाएंगे। वहीं से दिल्ली या मुंबई के लिए फ्लाइट मिलेगी। उम्मीद है कि वह बुधवार को भारत पहुंच जाएगा। उन्होंने बताया कि सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद माता-पिता की टेंशन कम हुई है। आदित्य वर्मा मेडिकल का छात्र है और वह चर्निवत्सि में पढ़ाई कर रहा है।