फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

होमगार्ड की नौकरी छोड़ मशरूम उत्पादन कर सालाना 21 लाख रुपये कमा रहे पंकज

विज्ञापन
माजरा खुर्द में लगाई गई मशरुम यूनिट की जांच करते पंकज यादव। संवाद - फोटो : Narnol
विज्ञापन
तीन साल पहले होमगार्ड की नौकरी छोड़कर 40 बैग से मशरूम की यूनिट शुरू करने वाले गांव माजरा खुर्द निवासी 23 वर्षीय पंकज यादव इस समय 2 हजार बैग मशरूम की यूनिट लगाकर सालाना करीब 21 लाख रुपये कमा रहे हैं। पंकज ने इसके लिए दो वर्ष पूर्व कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ से पांच दिवसीय प्रशिक्षण लेकर काम शुरू किया था।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि एक बैग यूनिट से तीन बार में औसतन 9 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन होता है, जिसका औसत भाव भी बाजार में 100 से 120 रुपये तक रहता है। वहीं दो हजार बैग की यूनिट से प्रतिवर्ष 180 क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर वह करीब 21 लाख 60 हजार रुपये का मशरूम तैयार करता है। लागत की बात करें तो एक बैग पर औसतन 120 रुपये की लागत आती है। एक बार में 2 हजार बैग की यूनिट लगाने के लिए करीब ढाई लाख रुपये का खर्च आता है। इस बैग को कंपोस्ट खाद एवं भूसा, पोटाश, सल्फर आदि की सहायता से तैयार किया जाता है। मार्केट में यह बैग आसानी से मिल जाते हैं। युवा स्वयं भी इसे तैयार कर सकते हैं, जिससे लागत और कम आएगी। संवाद
यह है लागत एवं उत्पादन
लागत की बात करें तो एक बैग पर 120 रुपये की लागत आती है जो तीन बार में 9 किलोग्राम मशरूम उत्पादन देता है। ऐसे में एक बैग से करीब 1080 रुपये का शुद्ध मुनाफा लिया जा रहा है। बचत की बात करें तो एक बैग से 1080 रुपये तथा दो हजार बैग की यूनिट से 21 लाख 60 हजार रुपये का मुनाफा लिया जा सकता है।
विज्ञापन

युवाओं को दे रहे निशुल्क प्रशिक्षण
पंकज इस समय जिले के युवाओं को मशरूम उत्पादन शुरू करने के लिए निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनका कहना है कि इस समय वह मशरूम उत्पादन बढ़ाने के लिए करीब 35 लाख रुपये की लागत से प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए काम कर रहा है, जो छह माह में बनकर तैयार हो जाएगा।
गुरुग्राम में अधिक मांग
पंकज यादव ने बताया कि मशरूम की खपत स्थायी बाजार में बड़ी आसानी से हो जाती है। इसके अलावा गुरुग्राम की मार्केट में उनके मशरूम की मांग अधिक है। गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि महेंद्रगढ़ शहर के अलावा आजादपुर मंडी, रेवाड़ी और गुरुग्राम की मार्केट में अच्छी मांग है। उन्होंने बताया कि उनके उत्पाद की गुणवत्ता सही है। 10 से 15 ग्राम तक की मशरूम अच्छी क्वालिटी एवं ए ग्रेड मेें आती है।
भूमिहीन युवाओं के लिए नहीं किसी वरदान से कम
कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ के मशरूम विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि केवीके द्वारा वर्ष में तीन बार पांच-पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन कर युवाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसे लेकर युवाओं में रुचि भी बढ़ रही है। इस समय जिले में करीब 50 युवा मशरूम उत्पादन कर रहे हैं। इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए अधिक भूमि की भी आवश्यकता नहीं होती। छोटी इकाई लगातार युवा आसानी से यह काम को शुरू कर सकते हैं। सितंबर से फरवरी तक प्राकृतिक रूप से उत्पादन कर सकते हैं। मशरूम उत्पादन भूमिहीन युवाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसे अपनाकर युवा आसानी से अपनी आजीविका चला सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें