मंडी अटेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत मिशन की शुरुआत कर शहर और गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने का प्रयास किया, परंतु योजनाओं के उचित क्रियान्वयन के बिना करोड़ों रुपयों के बजट की फाइलें औपचारिकता बन कर रह गई हैं। अटेली की बात करें तो बेशक इसे तहसील का दर्जा मिल गया, लेकिन शहर की साफ-सफाई व सार्वजनिक शौचालयों के अभाव की समस्याएं आज भी मुंह बायें खड़ी हैं।
2017 में सरकार ने जन सुविधा योजना के अंतर्गत अटेली तहसील ही नहीं पूरे जिले को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है, लेकिन अटेली कस्बे के दुकानदार व आम आदमी सार्वजनिक शौचालय की समस्या से जूझ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार 9200 की आबादी वाला अटेली शहर 11 वार्डों में बंटा हुआ है। जिसमें खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय, पुलिस स्टेशन, बिजली कार्यालय, तहसील कार्यालय, खजाना कार्यालय, नपा कार्यालय, अनाज मंडी, सब्जी मंडी के अलावा विभिन्न बैंक शाखाएं स्थापित हैं। जिसके कारण अटेली क्षेत्र के लगभग 50 गांव के लोगों का प्रतिदिन कस्बे में आवागमन रहता है। इसके अतिरिक्त दो महाविद्यालय, दो वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तथा दर्जनभर निजी स्कूल भी है। जिनमें ग्रामीण क्षेत्र से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं, लेकिन सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध न होने के कारण लोगों को शौच इत्यादि के लिए इधर-उधर खुले में नजर डालनी पड़ती है। लगभग 5 किलोमीटर की परिधि वाले अटेली शहर में नए बस स्टैंड, पुराने बस स्टैंड, झंडा चौक, रेलवे रोड, कनीना चौक, नांगल बेरियल व धनोंदा रोड बाजार बने हुए हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से सिर्फ झंडा चौक पर ही सार्वजनिक शौचालय बना हुआ है जो इतने विस्तृत शहर के लिए नाकाफी है। सार्वजनिक शौचालय की कमी को देखते हुए अनेक बार इस समस्या को प्रशासन के कानों तक पहुंचाई गई है, परंतु नपा प्रशासन व सरकार द्वार इस बारे कोई योजना तैयार नहीं की गई है। ऐसे हालात में नागरिकों को न जाने कब इस समस्या से निजात मिल सके।
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शौचालय की कमी को महसूस किया जा रहा है। उच्चाधिकारियों को इस समस्या के बारे में अवगत कराया गया है। आबादी को देखते हुए शौचालय की व्यवस्था होना आवश्यक है। जैसे ही शौचालय निर्माण के लिए जगह का प्रस्ताव सरकार की ओर से उपलब्ध हो जाएगा। उसी समय उनका निर्माण भी आरंभ करवा दिया जाएगा।-जतिन अग्रवाल, चेयरमैन नगर पालिका मंडी अटेली।