महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय ने सीमेंट के विकल्प के तौर पर जियोपॉलिमर कंक्रीट मिक्स डिजाइन तैयार किया है। यह मिक्स डिजाइन स्टील इंडस्ट्रीज के बाय प्रोडक्ट का निस्तारण करेगा और भवनों को भी सीमेंट के मुकाबले 70 एमपीए की मजबूती देगा। यह दूसरे जियोपॉलिमर से सस्ता होगा और इसका उपयोग करना भी आसान होगा।
बता दें कि हकेंवि के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी शोधार्थी दिव्या शर्मा ने सहायक प्राध्यापक डॉ. रणबीर सिंह के सुपरविजन में यह शोध किया है। शोध की शुरुआत वर्ष 2023 में विश्वविद्यालय की लेबोरेट्री में की गई। अब तीन साल में यह शोध पूरा हुआ है। डॉ. रणबीर सिंह के मुताबिक वर्तमान में भवनों में सामान्य गुणवत्ता का कंक्रीट प्रयोग किया जाता है और इसकी आयु भी कम रहती है। यह आविष्कार पारंपरिक कंक्रीट के अल्टरनेटिव के रूप में हाई-स्ट्रेंथ, टिकाऊ और इको-फ्रेंडली मटेरियल के विकास पर केंद्रित है। इस कंक्रीट को बनाने के लिए सीमेंट की आवश्यकता नहीं होगी। यह कंक्रीट क्रशर, रेती, रोड़ी,पानी आदि के साथ 70 एमपीए (मेगापास्कल) कंप्रेसिव स्ट्रेंथ प्रदान करता है।
डॉ. रणबीर सिंह ने बताया कि यह टेक्नोलॉजी संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है। पारंपरिक सीमेंट-बेस्ड कंक्रीट कार्बन उत्सर्जन का प्रमुख स्रोत है जबकि वन-पार्ट जियोपॉलिमर कंक्रीट इंडस्ट्रियल बाय-प्रोडक्ट्स का उपयोग करता है। इससे ऑर्डिनरी पोर्टलैंड सीमेंट (ओपीसी) पर निर्भरता कम होगी और सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए कुलपति डॉ. टंकेश्वर कुमार, विश्वविद्यालय की प्रथम महिला प्रो. सुनीता श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष प्रो. भास्कर दास, उप छात्रकल्याण अधिष्ठाता डॉ. नीरज कर्णसिंह ने पेटेंट के लिए टीम को बधाई दी है। संवाद
- तीन में से एक कंक्रीट डिजाइन को मिला पेटेंट:
विभाग प्रोफेसर डॉ. रणबीर सिंह ने बताया कि उनकी टीम ने लो, मीडियम व हाई तीन प्रकार के कंक्रीट मिक्स डिजाइन बनाए हैं। गत वर्ष उन्होंने हाई-स्ट्रेंथ वन-पार्ट जियोपॉलिमर कंक्रीट मिक्स डिजाइन के पेटेंट के लिए आवेदन किया था। अब 17 अप्रैल को भारत सरकार की ओर से प्रो. डॉ. रणबीर सिंह, शोधार्थी दिव्या शर्मा, अर्शदीप सिंह व कनिष कपूर को प्रदान किया गया है। साथ ही इस शोध कार्य से संबंधित चार शोध-पत्र प्रकाशित हुए हैं और दो बेस्ट पेपर अवॉर्ड राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कालीकट व राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र में प्राप्त हुए हैं।
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अन्य जियोपॉलिमर से होगा सस्ता व आसान रहेगा उपयोग
डॉ. रणबीर के मुताबिक अन्य जियोपॉलिमर कंक्रीट टू-पार्ट में होते हैं जबकि यह कंक्रीट वन पार्ट में बनाया गया है। इसके लिए स्लैग की उपलब्धता किसी भी स्टील इंडस्ट्री से आसानी से हो जाती है। इसको बनाने में अतिरिक्त खर्च या श्रम नहीं लगता। अन्य जियोपॉलिमर कंक्रीट के लिए केमिकल सॉल्यूशन को लगभग 24 घंटे पूर्व 60–90 डिग्री सेल्सियस तापमान पर तैयार करना पड़ता है और इसकी क्योरिंग (पकाने) के लिए भी उच्च तापमान की आवश्यकता होती है। इस कारण अन्य पॉलिमर का निर्माण महंगा पड़ता है। हकेंवि का यह जियोपॉलिमर सामान्य कंक्रीट की तरह क्रशर, बजरी, रेती, पानी आदि के साथ उपयोग किया जाता है। इससे यह सीमेंट व अन्य जियोपॉलिमर के मुकाबले सस्ता और टिकाऊ रहता है।
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- इस तरह बनाया कंक्रीट मिक्स डिजाइन:
पहले टीम की ओर से स्टील इंडस्ट्री से बाय प्रोडक्ट यानी स्लैग (स्टील या लोहे के छोटे कण) लाए गए और इसका बारीक पाउडर बना लिया। पाउडर में सोडियम मेटासिलिकेट रसायन मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया। इसके बाद विभिन्न तरह की मजबूती वाली कंक्रीट में इसका परीक्षण किया गया और सीमेंट के मुकाबले 70 एमपीए तक कंक्रीट की मजबूती पाई गई। अब संस्थान की इस डिजाइन को किसी इंडस्ट्री के साथ एमओयू करके बाजार में उतारने की योजना है।
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उपयोग के ये होंगे लाभ
- इको फ्रेंडली और कार्बन उत्सर्जन रहित।
- सीमेंट के मुकाबले अधिक मजबूती।
- दूसरे जियोपॉलिमर से सस्ता
- मजबूत वाटर प्रूफिंग क्षमता।
- लंबे समय तक टिकाऊ।
- इंडस्ट्रीयल बाय प्रोडक्ट का निस्तारण।