नारनौल। कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरोध में केंद्र और प्रदेश सरकार की ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का शुक्रवार को जिले में व्यापक असर देखने को मिला। हड़ताल के कारण आम लोगों को काफी परेशानी हुई। रोडवेज की जहां आधी से ज्यादा बसें नहीं चली वहीं सरकारी बैंकों में कामकाज नहीं हो पाया। बीएसएनएल, बिजली और एलआईसी के कर्मचारी भी पूर्ण हड़ताल पर रहे। इस कारण लोग शुक्रवार को दिनभर अपने कामों के लिए भटकते रहे। जिले में करीब 450 सरकारी कर्मचारी और 500 के करीब विभिन्न विभागों में लगे मजदूर भी हड़ताल पर रहे। रोडवेज की बसें न चलने के कारण डिपो को करीब सात से आठ लाख रुपये का घाटा हुआ। बैंकों में भी करोड़ों रुपये का लेनदेन प्रभावित रहा।
शुक्रवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण रोडवेज की 148 बसों में से सुबह नौ बजे तक केवल 20 बस ही निकाली गई। इसके बाद से बसें दिनभर सड़कों पर नजर नहीं आई। परेशानी लोगों ने निजी वाहनों का सहारा लिया। रोडवेज के जीएम सुरेंद्र यादव के अनुसार 148 में से 55 बसों का परिचालन किया गया। केवल 36 प्रतिशत कर्मचारी ही हड़ताल पर रहे जबकि रोडवेज यूनियन के जिला प्रधान राजपाल यादव के अनुसार करीब 90 प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर रहे। पांच दस बसें ही चल पाई। रोडवेज की बसें नहीं चलने से करीब सात से आठ लाख रुपये का नुकसान भी हुआ है।
पक्के हड़ताल पर कच्चे ने चलाया काम
बिजली निगम के कर्मचारियों ने पूर्ण रूप से हड़ताल रखी। इस कारण शहर में कई बार लोगों को बिजली संबंधी समस्याएं भी हुई। शहर के सिटी-3 फीडर में भी फाल्ट आया जो काफी देर बाद ठीक हुआ। सिहमा, हुडिना और निवाजनगर सहित कई अन्य फीडरों में भी फाल्ट आया। इसको शाम तक ठीक कर लिया गया।
बैंकों में रहा कामकाज ठप
स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बिकानेर व जयपुर, पंजाब नेशनल बैंक, ओरियंटल बैंक सहित कई बैंकों में कामकाज नहीं हुआ। इस कारण लोगों को भारी परेशानी हुई। इसी प्रकार बीएसएनएल और एलआईसी कर्मियों ने भी पूर्ण रूप से हड़ताल रखी।
- कर्मचारियों ने शहर में किया प्रदर्शन
हरियाणा कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर शुक्रवार को जनस्वास्थ्य विभाग शाखा नारनौल, नगर परिषद के कच्चे और पक्के कर्मचारी, हरियाणा बैंक इंपलाइज फेडरेशन, बिजली निगम, भारत संचार निगम लिमिटेड, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी और बीमा से जुड़े सभी कर्मचारी चितवन वाटिका में एकत्रित हुए। इस मौके पर कर्मचारियों ने केंद्र और राज्य सरकार की कर्मचारी और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
कर्मचारियों की यह थी मांगें
कर्मचारियों ने सरकार से बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने, सभी को रोजगार देने, सार्वजनिक राशन प्रणाली को दुरुस्त करने, कच्चे कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये देने, मनरेगा मजदूरी 500 रुपये करने, कर्मचारियों को पंजाब के समान वेतनमान देने, आशा वर्कर, मिड डे मील, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, ग्रामीण सफाई कर्मचारियों, ग्रामीण चौकीदारों, डीटीएच चौकीदारों व डाक सेवकों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, स्थायी कार्यों के लिए अस्थायी भर्ती प्रक्रिया नीति बंद करने, कच्चे, ठेके व आउटसोर्स पर लगे कर्मचारियों को पक्का करने, निजीकरण पर रोक लगाने, खेत मजदूरों सहित सभी मजदूरों का पंजीकरण करने, ब्लाक स्तर पर मजदूरों के शिकायत केंद्र खोलने, श्रम कानून में पूंजीपति मालिकों के स्वार्थ में बदलाव बंद करने, बैंक, बीमा, रेलवे व प्रतिरक्षा आदि में एफडीआई मंजूरी वापस लेने, कृषि भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने के अलावा अन्य मांगें पूरी करने की मांग की।
इस मौके पर रोहताश गोठवाल, धर्मेंद्र यादव, मधु देवी, कामरेड सुभाष चंद, सीताराम, राजपाल यादव, महेंद्र सिंह, रमेश कुमार निंबल, पूर्ण चंद जैदिया, वेदप्रकाश, जगन लाल निनाणियां, कौशल कुमार, रमेश चंद, दिनेश यादव, राजेश डागी, महेंद्र सिंह बोयत, रजनीश यादव, धर्मबीर सिंह, हरकेश सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।