नारनौल। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसवाईएल पर दिए गए फैसले का सबसे बड़ा फायदा दक्षिणी हरियाणा के लोगों को होगा। दक्षिणी हरियाणा के लोग ही एसवाईएल के पानी की मांग वर्षों से कर रहे हैं। इसके लिए सबसे पहला युद्ध भी नारनौल में 1991 में लड़ा गया था। उस समय पूर्व विधायक रघु यादव ने आईटीआई मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन किया था। जिसे तत्कालीन भजनलाल सरकार के आदेश पर प्रशासन ने कुचल दिया था। इसमें नारनौल क्षेत्र के दो लोगों ने शहादत दी थी। वहीं सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। घायलों में पूर्व विधायक रघु यादव भी शामिल थे। कोर्ट के फैसले का यहां के सभी पार्टियों के नेताओं ने दिल खोलकर स्वागत किया है।
सतलुज और यमुना नदियों को जोड़ने के लिए एक प्रस्तावित 214 किलोमीटर लंबी नहर परियोजना है। वर्तमान में भारतीय सर्वोच्च न्यायालय में यह परियोजना लंबित थी। इस विवाद की शुरूआत तब हुई जब 31 अक्टूबर 1966 को पंजाब राज्य को पुनर्गठित किया गया और एक नवंबर को हरियाणा राज्य बना था। विवाद का प्रमुख जड़ नदी जल का बंटवारा है। 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और फैसला किया कि दोनों राज्य अर्थात प्रत्येक 3.5 मिलियन एकड़ फुट पानी प्राप्त करेंगे। मगर हरियाणा के लोगों को पानी नहीं मिला तथा पंजाब ने इसका विरोध शुरू कर दिया। जनवरी 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने परियोजना की खुदाई जारी रखने के लिए पंजाब सरकार को निर्देश दिया। 2003 में पंजाब ने इस दायित्व से मुक्त होने की सोची और 2004 में पंजाब राज्य विधानमंडल ने भूमि को डिनोटिफाई करने के लिए पंजाब टर्मिनेशन ऑफ अग्रीमेंट एक्ट-2004 पारित किया। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक प्रेसिडेंशियल रिफरेन्स दी गयी और मार्च 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई आरंभ किया। 2016 में पंजाब विधानसभा में पुन: एक विधेयक पास कर किसानों को अधिग्रहीत भूमि वापस करने की बात की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने विधेयक पर यथास्थिति का आदेश दिया था और वीरवार संबंध में फैसला दिया है।
क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा एसवाईएल पर दिया गया फैसला: अभय सिंह
नांगल चौधरी के विधायक देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सतलुज-यमुना नहर के मामले में दिया गया फैसला दक्षिणी हरियाणा के लिए बहुत बड़ा वरदान साबित होगा तथा क्षेत्र की जनता इसके लिए सुप्रीम कोर्ट और प्रदेश के मुख्यमंत्री का हार्दिक धन्यवाद करती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में दक्षिणी हरियाणा की शुष्क धरती की प्यास बुझेगी तथा दक्षिणी हरियाणा समेत राज्य के विकास को एक नई दिशा एवं गति मिलेगी। क्षेत्र की जनता हरियाणा सरकार का विशेष रूप से इसलिए आभार है कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद पिछले एक दशक से पुराने मामले की सुनवाई के लिए हरियाणा सरकार ने पुरजोर पैरवी की।
एसवाईएल पर ऐतिहासिक फैसला : संतोष
अटेली की विधायक सतलुज यमुना नहर के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला एतिहासिक है तथा दक्षिणी हरियाणा का इस पर दूरगामी सकारात्मक असर पड़ेगा। इस ऐतिहासिक फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट और हरियाणा सरकार तथा विशेषकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल का क्षेत्र की जनता आभार व्यक्त करती है। यह फैसला इस क्षेत्र के लिए बहुत ही बड़ा फैसला है। इस क्षेत्र में यह दूसरी दीपावली की तरह है। इससे बड़ा और कोई तोहफा इस क्षेत्र के लिए नहीं हो सकता।
इनेलो ने की थी पैरवी
इनेलो के जिला प्रवक्ता बजरंगलाल अग्रवाल ने कहा कि एसवाईएल का पानी लाने के लिए इनेलो ने पैरवी की थी। पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने इसके लिए कड़ा संघर्ष किया। यह फैसला ऐतिहासिक है तथा इससे प्रदेश के लोगों की जीत हुई है। इनेलो इसका स्वागत करती है।
कांग्रेस ने भी कोर्ट में की थी पूरी पैरवी
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने इस मुद्दे की पूरजोर पैरवी सुप्रीम कोर्ट में की थी। कांग्रेस सरकार द्वारा की गई पैरवी का नतीजा है कि आज यह फैसला प्रदेश के पक्ष में आया है।