नारनौल। कोरियावास स्थित महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। सोमवार को ओपीडी और रेडियोलॉजी विंग के उद्घाटन से ठीक पहले रातों रात कॉलेज के मुख्य गेट नंबर-1 से महर्षि च्यवन का बोर्ड हटाकर राव तुलाराम के नाम का बोर्ड लगा दिया। इससे जनता में रोष है।
महर्षि च्यवन के नाम पर बना मेडिकल कॉलेज अपने नाम को लेकर शुरू से विवादों में चला रहा है। मेडिकल कॉलेज का नाम राव तुलाराम के नाम पर रखने को लेकर धरना व प्रदर्शन भी हो चुका है।
वहीं जनता में आक्रोश को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा इसके अंदर स्थापित किए जाने अस्पताल का नाम राव तुलाराम के नाम से रखने की घोषणा कर मेडिकल कॉलेज का नाम न बदलने का संकेत दे दिया था। परन्तु अचानक गेट पर नाम बदल देने से मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है।
इतिहास एवं संस्कृति संरक्षण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नारनौल बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान मनीष वशिष्ठ एडवोकेट ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य मंत्री आरती राव तुरंत गेट पर ‘महर्षि च्यवन’ का बोर्ड दोबारा लगाने के आदेश नहीं देती हैं तो इसे क्षेत्र में जातीय राजनीति को बढ़ावा देने के रूप में देखा जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना बिगड़ सकता है। मनीष वशिष्ठ ने कहा कि इस अस्पताल का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिमोट के माध्यम से किया जा चुका है। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री आरती राव भी ओपीडी का उद्घाटन कर चुकी हैं और अब फिर एक कक्ष का लोकार्पण किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अपने नारनौल दौरे के दौरान स्पष्ट कर चुके हैं कि अस्पताल का नाम ‘महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज कोरियावास’ ही रहेगा जबकि ओपीडी कक्ष का नाम ‘शहीद राव तुल्ला राम’ के नाम पर रखा जाएगा।
इस पर दोनों पक्षों की सहमति भी बन चुकी थी। इसके बावजूद, गेट नंबर-1 से ‘महर्षि च्यवन’ का नाम हटाकर रातों-रात ‘राव तुल्ला राम’ का नाम लिख देना सरासर जातीय राजनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसके बाद क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश दोनों बढ़ते नजर आ रहे हैं। उद्घाटन कार्यक्रम के बीच उठा यह विवाद अब बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।फिलहाल, सभी की निगाहें स्वास्थ्य मंत्री के अगले कदम पर टिकी हैं। अब देखना यह है कि सरकार इस विवाद को समय रहते शांत करती है या मामला और अधिक गरमाता है।