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कोरियावास में बनने वाले मेडिकल कॉलेज का काम लेबर और सामान नहीं होने से रुका

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नारनौल। कोरियावास में बनने वाले मेडिकल कॉलेज के भवन पर कोरोना ने ब्रेक लगा दिया है। कोरोना के चलते न तो साइट पर लेबर बची है और न ही इंजीनियर। बाहर से आना वाला सामान ट्रांसपोर्टेशन के चलते पहुंच नहीं पा रहा है। इसके अलावा ऑक्सीजन की कमी के कारण तकनीकी काम भी रुक गए हैं। कंस्ट्रक्शन कंपनी के अधिकारियों की मानें तो कोरोना के चलते प्रोजेक्ट अब अधिक लेट हो सकता है।
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लगभग 600 करोड़ की लागत से बनने वाले कोरियावास मेडिकल कालेज में कोरोना काल से पहले 12 सौ से 14 सौ लोग कार्य करते थे। लेकिन जैसे ही सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान किया तो लेबर साइट से चली गई। कुछ बचे तो उनको कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया। इसलिए अब काम एकदम से रुक गया है।
ट्रांसपोर्टेशन की बड़ी दिक्कत
मौके पर कार्य संभाल रहे कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल कालेज के निर्माण में प्रयोग होने वाला अधिकतर सामान दक्षिण के राज्यों से आ रहा है। लॉकडाउन के चलते अब ट्रांसपोर्टेशन का कार्य नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा तकनीकी कार्य में काम करते समय ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है जो अभी बंद है। इसलिए भी काम सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।
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कॉलेज में बनने हैं एक दर्जन भवन
निर्माण कंपनी के अधिकारियों के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत काम तो पूरा हो चुका है। मगर सबसे महत्वपूर्ण कार्य अंतिम चरण का ही होता है। फिनिशिंग के दौरान सारा काम तकनीकी तौर पर किया जाता है। इस कार्य में बड़े इंजीनियर्स की सहायता लेनी पड़ती है। लेकिन हालत यह है कि कोरोना के चलते कोई रिस्क नहीं लेना चाहता, लिहाजा सभी अपने अपने घर चले गए हैं।
पहले भी रुका था काम, लेकिन बाद में हो गया था शुरू
कोरोना के पहले चरण में भी कार्य रुक गया था। जैसे ही इससे राहत मिली थी तो कंपनी ने कॉलेज निर्माण के कार्य को काफी तेज कर दिया था। सितंबर 2020 में कार्य फिर शुरू हुआ, लेकिन निर्माण सामग्री, लेबर आदि की कम उपलब्धता के चलते एक-डेढ़ महीने काम प्रभावित ही रहा। अब दो तीन महीने से कार्य पूरी गति से चल रहा था। इसी का परिणाम है कि अब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कई भवनों का निर्माण कार्य पूरा कर उनमें फिनिशिंग कार्य किया जा रहा है।
ऐसा होगा कॉलेज का भवन
710 बेड के इस मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक भवन होगा, इसके अलावा 634 कमरों का हॉस्टल होगा। इसमें 320 लड़कों व 314 लड़कियों की रहने की व्यवस्था होगी। 600 विद्यार्थियों के लिए परीक्षा भवन होगा। 54 कमरों का सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स का हॉस्टल तो 75 जूनियर का होगा। 75 कमरों का नर्सों का हॉस्टल, प्राचार्य निवास, 72 स्टाफ क्वार्टर, 16 कमरों का गेस्ट हाउस, शव परीक्षा कक्ष, शव कक्ष, विद्युत शव दाह भट्टी, पुलिस स्टेशन, बिजली का सब स्टेशन, कैंटीन, रैन बसेरा, सुलभ शौचालय आदि सुविधाएं सम्मलित होंगी। इसके अतिरिक्त केंद्रीय कार्यशाला, 5 लेक्चरर हॉल और सभी यंत्रों से सुसज्जित प्रयोगशाला होगी।
भवन निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा था। लेकिन एकाएक कोरोना ने सारा काम खराब कर दिया। अब स्टाफ से लेकर सामान तक की बहुत गंभीर समस्या बनी हुई है। लेबर न के बराबर बची है। इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन बंद होने से सामान भी नहीं आ पा रहा है। ऑक्सीजन की मारामारी का भी काम पर भी असर हुआ है। जब हालात सही होंगे उसके बाद ही काम को तेजी से करके जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
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-आरके राणा, जीएम, आहलुवालिया कांट्रेक्ट इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली
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