नम आंखों से हुआ शहीद का अंतिम संस्कार
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महाराष्ट्र के पुलगांव स्थित सेना के सबसे बड़े आयुध भंडार में लगी भयंकर आग में शहीद गांव मारोल के जवान रामचंद्र का अंतिम संस्कार सैनिक सम्मान के साथ कर दिया। शुक्रवार शाम को गांव के लाडले रामचंद्र का पार्थिव शव पैतृक गांव मारोली पहुंचा। इसके बाद देर सायं जवान का सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर डीएसपी राजेश के नेतृत्व में पांच पुलिस के जवानों ने शहीद को सलामी दी। हादसे की सूचना के बाद से ही पूरा परिवार और गांव शोक में हैै। शहीद रामचंद्र का भतीजा मनोज सीआरपीएफ उड़ीसा में तैनात है। चाचा के शहीद होने की खबर सुनते ही मनोज उड़ीसा से केंद्रीय आयुध भंडार पुलगांव पहुंचा। शुक्रवार को शहीद का पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंचने पर सेना के जवानों और अधिकारियों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। शहीद रामचंद्र तीन भाइयों में सबसे छोटा था। उनके बड़े भाई सूबा राम ने बताया कि रामचंद्र 2002 में भर्ती हुआ था। अभी वह लायंस नायक के पद पर पुलगांव आयुध भंडार में तैनात थे।
पीयूष कर रहा पिता का इंतजार, बेटियां बेसुध
रामचंद्र की चार संतानों में तीन बेेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी सुषमा 16 वर्ष, सुधा 14 वर्ष, प्रीति 8 वर्ष और एक वर्षीय बेटा पीयूष हैै। पिता के शहीद होने के बाद तीनों बेेटियां बेसुध हैं। एक वर्षीय मासूम पीयूष को पिता के शहीद होने का पता ही नहीं है। हादसे की सूचना के बाद से शहीद रामचंद्र की माता मिश्री देवी भी रह-रहकर अपने छोटे पुत्र को याद कर विलाप कर रहीं हैं। शहीद होने की सूचना के बाद से ही गांव में शोक है। अंतिम संस्कार में एसडीएम सुरेश, डीएसपी राजेश, नायब तहसीलदार, एसएचओ शिवकुमार के अलावा सेना के जेसीओ और चार जवानों ने कांग्रेसी नेता चंद्रप्रकाश, बीजेपी जिलाध्यक्ष शिवकुमार महता, पार्षद विनोद कुमार, पंचायत समिति उप चेयरमैन जितेंद्र, राजकुमार पूूर्व सरपंच दनचौली, लिच्छाराम कारोली, हजारीलाल समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।