नारनौल। दीपावली पर्व हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है। इस पर्व की शुरुआत धनतेरस से हो जाती है। इस बार दीपों का त्योहार सोमवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इसको लेकर रविवार को शहर के बाजारों में खासी भीड़ रही। लोगों ने मिठाइयों, घर की साज सज्जा सहित अन्य सामान का जमकर खरीदारी की। इससे बाजारों में चहल-पहल रही। बाजारों में दिनभर और शहर के मुख्य सड़क मार्गों पर भी अधिक वाहनों के कारण जाम की स्थिति बनी रही। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था को देखते पुलिस कर्मचारियों की तैनाती की गई थी।
दीपावली का पर्व हर वर्ष कार्तिक अमावस्या के दिन प्रदोष काल में मनाया जाता है। यह त्योहार प्रभु श्रीराम के 14 वर्षों बाद वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को दीयों की रोशनी से रोशन करते हैं और मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। इसलिए रोशनी के इस पर्व को खुशियों का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन घरों व प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी जी की विशेष पूजा की जाती है। क्योंकि लक्ष्मी जी को धन की देवी माना गया है। शुभ मुहूर्त और विधि विधान से पूजा करने से लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आचार्य बजरंग शास्त्री ने अनुसार इस बार दीपावली पूजन का मुहूर्त अलग-अलग समय लग्न अनुसार रहेगा। जिसमें वृषभ लग्न शाम 6:54 से 8 :50 तक व मिथुन लग्न रात को 8 :50 से 10:59 तक रहेगा। जिसमें व्याप्त काल के चौघड़िया के स्वामी शनि कहे गए हैं। इससे संबंधित चौघड़िया में पूजा करने वाले को शनि नुकसान नहीं पहुंचाता। इसके बाद कर्क लग्न 10:59 से रात के 1:59 तक रहेगा। जिसमें लाभ का चौघड़िया भी रहेगा। दीपावली पूजन में श्रेष्ठ मुहूर्त निशीथ काल भी इसी समय के मध्य में रहेगा जो कार्य सिद्धि में सहायक माना जाता है। दिवाली महा निशीथ काल मुहूर्त रात 11:40 से रात 12:31 बजे तक रहेगा। सिंह लग्न रात्रि 1:23 से 3:40 तक रहेगा। वहीं आचार्य बजरंग शास्त्री ने बताया कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजन से पूर्व स्थान को जल से शुद्ध करें। इसके बाद कलश को तिलक और पत्ते नारियल आदि लगाकर मौली बांधकर स्थापित करें। कलश पूजन करें। हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर गणेश जी और लक्ष्मी जी का ध्यान लगाएं। इसके बाद सभी चीजों को गणेश लक्ष्मी जी और कलश पर चढ़ा दें। इसे पश्चात गणेश जी और लक्ष्मी जी पर भी पुष्प और अक्षत अर्पित चढ़ाएं। इसके उपरांत लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति को थाली में रखकर दूध, दही, शहद, तुलसी और गंगाजल के मिश्रण से स्नान कराएं। बाद में स्वच्छ जल से स्नान कराएं। इसके बाद लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करें। लक्ष्मी जी और गणेश जी को चंदन का तिलक लगाएं और पुष्प माला पहनाएं, खील-खिलौने, पतीशे, मिष्ठान, फल, रुपये और स्वर्ण आभूषण बही बसना आदि रखें और और पूजा के पूर्ण फल प्राप्ति के लिए आरती करें।
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लोगों ने जमकर की खरीदारी
दीपावली को लेकर लोगों ने जमकर खरीदारी की। मिठाई के साथ मिट्टी के खिलौने, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, खिल, पतीसा आदि की खरीददारी की। इस बार लोगों ने स्वदेशी अपनाओ की तर्ज पर दीये खूब खरीदे । हालांकि बाजार में चाइनीज लाइटें भी उपलब्ध रहीं, किंतु पूर्व के वर्षों की अपेक्षा इस बार चाइनीज लाइटों का कारोबार फीका रहा। मगर लोगों चाइनीज लाइटों का भी इस्तेमाल घरों व दुकानों को सजाने में किया।
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- पटाखों के प्रयोग, बिक्री व उत्पादन पर प्रतिबंध
उपायुक्त डॉ. जयकृष्ण आभीर ने आदेश जारी कर जिले में विस्फोटक अधिनियम व भारतीय दंड प्रक्रिया 1973 के तहत पटाखों की बिक्री, उत्पादन व इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिला में केवल ग्रीन पटाखों का ही प्रयोग किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि कोई भी दुकानदार पटाखा बेचते पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस विभाग, पंचायत विभाग, नगर परिषद अधिकारियों और तहसीलदार को आदेश की पालना पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।