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रोडवेज बसों के कंडम होने की वजह से कई रूट बंद हो ग

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रोडवेज डिपो में खड़ी मिनी बसें। - फोटो : Narnol
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नारनौल डिपो में कुल बसों में से 41 बसें कंडम हो चुकी हैं। इस वजह से विभिन्न ग्रामीण रूटों पर बसों का संचलान बंद पड़ा है जबकि कई रूटों पर बसों के चक्कर कम हो गए हैं। जिले में कुल 154 बसों में 41 बसें कंडम हो चुकी हैं। मात्र 102 बसों का ही संचालन हो रहा है। 9 मिनी बसें वर्कशॉप में धूल फांक रही हैं।
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सरकार की ओर से लीज पर ली गई 20 बसे विभिन्न रूटों पर चल रही हैं। जिले में 106 रूटों पर 122 बसें दौड़ रही हैं। अभी भी कई ग्रामीण रूट ऐसे हैं जहां पर पहले बसें चलती थी लेकिन अब नहीं चल रही हैं जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा के दौरान भी यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी थी। इसके अलावा विभाग का राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। वहीं रोडवेज डिपो के अधिकारियों का दावा है कि लगभग रूटों पर बसों का संचालन हो रहा है। मांग के अनुसार बसें चला दी जाती हैं।
समाज सेवी राम निवास पाटोदा ने बताया कि कई ग्रामीण रूटों पर पहले बसें चलती थी लेकिन अब नहीं चल रही है। इनमें नानकवास, पल्ह-पाल-गडानिया, डेरोली अहीर, कुराहवटा, मुंडायन, सुरजनवास, देवास, बुचौली शामिल हैं। इन रूटों पर पहले बसें चल चुकी हैं लेकिन अब बंद हैं। इसके अलावा कई गांव ऐसे हैं जहां पर सुबह और शाम को एक-एक चक्कर ही लग रहा है। ऐसे में खेड़ी तलवाना, गागड़वास-बचीनी, दूूलोठ अहीर के अलावा अन्य ग्रामीण रूट शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विवाह शादी का सीजन शुरू हो गया है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग शहरों में निजी साधन लाकर खरीददारी करनी पड़ रही है। रिश्तेदारों को गंतव्य तक जाने में परेशानी हो रही है।
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जिले को 2019 में सरकार की ओर से ग्रामीण रूटों पर चलाने के लिए 9 मिनी बसें दी गई थीं। सरकार के आदेश पर कोरोना काल में पांच बसों को एंबुलेंस बना दिया गया था और उसी दौरान चार बसें झज्जर भेज दी गई थीं वो बसें अभी तक नहीं आई हैं। वर्कशाप में खड़ी सभी मिनी बसें एंबुलेंस के रूप में धूल फांक रहीं। किसी भी रूट पर नहीं चलने से सरकार को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
नारनौल बस डिपो की 41 बसें कंडम घोषित हो चुकी हैं। इनमें से 29 बसें अगस्त माह के बाद कंडम हुई हैं। सभी बसेें वर्कशाप में खड़ी हुई हैं। अधिकारियों की माने तक इनमें चार पांच बसों ठीक हो सकती है। चार पांच दिन पहले हैड ऑफिस की टीम ने वर्कशाप का दौरा किया था। उनके अनुसार चार पांच बसें ही ठीक हो सकती हैं। जल्द ही इनको ठीक करवाया जा सकता है। चार पांच बसों का कोर्ट केस चल रहा है।
सरकार की ओर से डिपो को 30 बसों की स्वीकृति मिल चुकी है। सरकार गाड़ियां बनवा रही हैं। पूरे प्रदेश के लिए लगभग 800 गाड़ियां नई बनवाई जा रही हैं। इनमें 30 गाड़ियां नारनौल डिपो को मिलेगी। जिले के अधिकतर रूटों पर बसें चल रही हैं जहां मांग आती है वहां पर बसें चलाई जा रही हैं। -नवीन शर्मा, जीएम, नारनौल डिपो।
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