वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मौजूद अधिकारी । संवाद
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सभी सरकारी तथा गैर सरकारी अस्पताल तथा लेबोरेटरी का जैव चिकित्सा अपशिष्टों (बायो मेडिकल वेस्ट) का राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देशानुसार ही प्रबंधन व निष्पादन होना चाहिए। अगर कोई इन नियमोें की अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। यह निर्देश स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रदेश के सभी एडीसी, सीएमओ तथा पशुपालन विभाग के उप निदेशकों की बैठक में दिए।
उन्होंने कहा कि सभी सरकारी तथा गैर सरकारी अस्पतालों का जैव चिकित्सा अपशिष्टों को उठाने के लिए एजेंसिया लगाई गई हैं। इन्हीं एजेंसियों के माध्यम से कूड़ा उठाया जाना चाहिए। पशु अस्पतालों के लिए भी यही एजेंसी कार्यरत हैं। जिले में जिस एजेंसी को यह कार्य दिया गया है वह एजेंसी सभी सरकारी तथा गैर सरकारी अस्पतालों से कूड़ा उठाने के लिए पाबंद है। सभी अस्पताल अपने यहां अलग-अलग श्रेणी में कूड़े को रखेंगे तथा यह एजेंसी उसको भिवानी जिले में बनाए गए अपशिष्ट उपचार संयंत्र के माध्यम से निस्तारण करेंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि अगर कहीं भी कोई अस्पताल चिकित्सा अपशिष्टों को जलाता है या कहीं भी छुपाने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ जिला प्रशासन सख्त कार्रवाई करे।
एसीएस ने निर्देश दिए कि इस एजेंसी को सभी सरकारी तथा गैर सरकारी अस्पतालों से कूड़ा उठाना होता है। अगर वह निर्धारित समय पर कूड़ा नहीं उठाता है तो उसकी सूचना भी मुख्यालय को भिजवाई जाए। सभी अस्पताल अपने यहां अलग-अलग रंग के श्रेणी के हिसाब से डिब्बे भी रखेंगे। यह पूरी तरह से बंद होने चाहिए। सभी अस्पतालों को यह निर्देश दिए जाएं कि इस कार्य को करने वाले स्टाफ को अच्छी तरह से प्रशिक्षण दिया जाए। जैव चिकित्सा अपशिष्टों का प्रबंधन बहुत ही जरूरी है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इस बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार व पशुपालन विभाग के डीडीए डॉ. नसीब सिंह के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद रहे।