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स्टेडियम में सुविधाओं की कमी

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जिले में एक भी ढंग का स्टेडियम नहीं है। कई खेलों के कोच नहीं हैं और खेल उपकरणों का अभाव है। जिसके चलते राज्य के दूसरे जिलों के मुकाबले यहां से खिलाड़ी नहीं निकल पा रहे हैं। हाल ही में संपन्न हुए टोक्यो ओलंपिक में जिले के संदीप पूनिया ने पैदल चाल में हिस्सा लिया था। वह ओलंपिक जाने वाला जिले का एकमात्र खिलाड़ी था, लेकिन उसने भी यहां प्रशिक्षण नहीं लिया। वह सेना में है और उसकी सारी ट्रेनिंग भी वहीं करवाई गई।
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सलामपुरा में एक स्टेडियम है जिसका ट्रैक सिर्फ तीन सौ मीटर का है। इसकी इमारत बहुत जर्जर हो गई थी, अब नया प्रशासनिक भवन बनाया गया है। इस स्टेडियम में सिर्फ आर्चरी का प्रशिक्षण दिया जाता है और बास्केटबाल कोर्ट है। जिले में पांच कोच हैं जो आर्चरी, वॉलीबाल, कुश्ती, जूडो और बॉक्सिंग की ट्रेनिंग देते हैं। एथलेटिक्स, बास्केटबाल समेत कई खेलों के प्रशिक्षक ही नहीं हैं। यहां के कई खिलाड़ी पहले आर्चरी, कुश्ती, वॉलीबाल, जूडो व बॉक्सिंग में राष्ट्रीय स्तर तक जिले का नाम रोशन कर चुके हैं। जिले में प्रतिभाएं हैं, पर तराशने के लिए प्रशिक्षक नहीं हैं। अधिकारी कई बार कोच नियुक्त करने को पत्र लिख चुके हैं परंतु कुछ नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कुछ वर्ष पूर्व नारनौल में आयोजित एक रैली में स्थानीय विधायक की मांग पर एक बड़ा खेल स्टेडियम बनवाने की घोषणा की थी। जिसके बाद विभाग ने स्टेडियम के लिए द्वारा जमीन की तलाश शुरू की। पहले रघुनाथपुरा के पास जगह देखी गई, लेकिन वहां जमीन नहीं मिल पाई। इसके बाद नसीबपुर के पास बाबा जेठू मंदिर के आसपास की जमीन पर खेल स्टेडियम बनाने का चर्चा हुई। मगर अभी तक खेल स्टेडियम के लिए जगह फाइनल नहीं हो पाई।
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कोरोना काल से पूर्व सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें तराशने के उद्देश्य से जिले में करीब डेढ़ दर्जन विभिन्न खेलों की नर्सियां खोली थीं। ज्यादातर नर्सरी स्कूलों में खोली गई थीं। जिनमें कोच भी नियुक्त किए गए थे मगर इन नर्सरी को खेल का सामान उपलब्ध नहीं करवाया गया। जिस कारण कुछ दिन बाद ही खिलाड़ियों ने वहां जाने से मुंह मोड़ लिया।
जिले में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर विभाग के आदेशानुसार खेल प्रतियोगिताएं करवाई जाती है। प्रशिक्षकों की डिमांड अनुसार उन्हें खेल सामान भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। विभिन्न खेलों के प्रशिक्षकों की नियुक्ति के लिए भी उच्चाधिकारियों से कई बार पत्राचार किया गया है। - परसराम, जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी, नारनौल।
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