कोरोना महामारी में डॉक्टरों समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी लगातार काम कर रहे हैं। जिसे भी जो जिम्मेदारी मिली, इसे बखूबी निभाई। उन्होंने इस महामारी की चुनौती स्वीकार की और मरीजों को बेहतर सेवाएं देने का पूरा प्रयास किया। इसका नजीता है कि जिले में लगाकर कोरोना मरीजों की संख्या कम हो रही है। नारनौल शहर जो पहले कोरोना का हॉट स्पॉट बना हुआ था, वहां कोरोना वायरस का फिलहाल एक केस एक्टिव है।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. हर्ष ने संभाला कोरोना प्रबंधन का कार्य
जिला नागरिक अस्पताल के फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. हर्ष चौहान कोरोना महामरी में कोविड-19 केयर सेंटर पटीकरा का पूरा कार्य संभाला। मरीजों के रुकने और उन्हें उपचार देने वाले डॉक्टरों के साथ मिलकर प्रबंधन का काम किया। डॉ. हर्ष ने मई में पहले अस्पताल के कोरोना आइसोलेशन का कार्य संभाला। बाद में कोविड-19 केयर सेंटर, डॉटा मैनेजमेंट, मरीजों के आइसोलेशन और मरीजों को ट्रीममेंट जैसे अन्य कार्यों पर काम किया। इस दौरान शुरूआत के तीन माह तक घर से अलग रहे और कोरोना प्रबंधन का काम देखते रहे। अभी भी कोरोना केयर सेंटर से जुड़े कार्यों को कर रहे हैं।
स्टाफ का हौसला बढ़ाया: डॉ. प्रमोद कुमार
नागरिक अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार ने अस्पताल में आने वाले कोरोना संभावितों का सैंपल लेने का काम किया। सबसे पहले डॉ. प्रमोद ऐसे लोगों के सैंपल लेने का किया और अन्य कर्मचारियों व स्टाफ का हौसला बढ़ाया। कोविड-19 जांच केंद्र पर हमेशा आगे रहे। पहले कुछेक कर्मचारी कोरोना मरीजों के सैंपल लेने में कतरा रहे थे। ऐसे में ईएनटी सर्जन होने के कारण डॉ. प्रमोद कुमार आगे आए और अन्य को राह दिखाई।
हॉट स्पॉट नारनौल शहर को संभाला- डॉ. नरेंद्र कुमार
नागरिक अस्पताल के डॉ. नरेंद्र कुमार को नारनौल शहर की जिम्मेदारी दी गई। डॉ. नरेंद्र ने कैंसर और सांस के गंभीर मरीजों को होम आइसोलेशन के दौरान बेहतर चिकित्सा सुविधा दी। इसके अलावा टीम के डॉ. ज्योत्सना, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सुचिता व डॉ. पुष्पेंद्र के साथ मिलकर एक-एक कोरोना मरीज के संपर्क में आए लोगों की स्क्रीनिंग की। पूरे जिले में सबसे अधिक कोरोना मरीज नारनौल शहर में आए। सबसे पहले मरीज भी नारनौल के हुडा सेक्टर में आए थे। अब नारनौल में एक ही एक्टिव केस है।
सात माह से घर नहीं गए नरेश कुमार
नागरिक अस्पताल के फ्लू कार्नर में तैनात टेक्नीकल ऑफिसर नरेश कुमार सात माह से घर नहीं गए। अस्पताल में कोरोना मरीजों के सैंपल लेेने का कार्य बखूूूूबी संभाल रहे हैं। नरेेेश ने बताया कि इस दौरान करीब 8200 लोगों के सैंपल लिए। मई में कोरोना केेेस आने के बाद से ही घर जाना छोड़ रखा है। अग्रवाल धर्मशाला में रहकर अस्पताल में सैंपलिंग का कार्य कर रहे हैं। भिवानी निवासी नरेश ने बताया कि बच्चों और पत्नी से मोबाइल पर ही बातचीत होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि सैकड़ों लोगों के सैंपल लेने के बाद भी अभी संक्रमण से बचे हुए हैं।
मोबाइल बैन का कार्य संभाला : सतेंद्र चौहान
ईएमटी सतेंद्र चौहान कोरोना वायरस के लिए मोबाइल टीम का कार्य संभाला। शुरूआत में मोबाइल टीम के इंचार्ज के रुप में सैंपल लेने का काम किया। अब तक करीब 17000 लोगों सैंपल ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि पहले अलग-अलग जगहों पर मरीज मिलने पर अधिक भागदौड़ रहती थी। नांगल चौधरी से कनीना तक एक ही दिन में जाना पड़ता था। शुरुआत के तीन माह तक लगातार काम करते रहे और कोई अवकाश नहीं लिया। सतेंद्र ने बताया कि मार्च से लेकर अभी तक मोबाइल टीम को संभाला। उन्होंने बताया कि सीएमओ डॉ. अशोक कुमार ने जो पहले दिन से जिम्मेदारी दी। इसे पूरा किया। शुरुआत में मोबाइल वैन पर12 घंटे तक पीपीई किट पहनकर सैंपल लेने में लगे रहते थे। हालांकि अब कई टीमें बने गई हैं।