महेंद्रगढ़। गांव रिवासा में छप्परों में लगी आग से चार छप्पर सहित सवा लाख रुपये सामान जलकर राख हो गया। बिजली के कारण लगी आग पर ढाई घंटों में काबू पाया गया। सूचना मिलने पर पहुंची दो दमकल गाड़ियों ने आग को बुझाया। आग लगने के दौरान घर पर कोई नहीं था। पशु छप्पर के अंदर बंधे हुए थे।
गांव रिवासा निवासी पीड़ित सत्यप्रकाश ने बताया कि वो बहुत गरीब हैं और दूसरों की खेत लेकर खेती करते हैं। वो खेत में गए थे। उनको फोन पर सूचना मिली थी कि उनके छप्परों में आग गई है। जब वो मौके पर पहुंचे तब आग लपटें ऊंची जा रही थी। ग्रामीणों ने आग को बुझाने का प्रयास भी किया लेकिन आग पर काबू नहीं पाया गया। सूचना मिलने पर पहुंची दमकल गाडिय़ों ने आग का बुझाया। तब तक उनका सवा लाख रुपये की फसल, फर्नीचर तथा कपड़े आदि जलकर राख हो गए थे।
खाने के गेहूं भी नहीं बचे
सतप्रकाश ने बताया कि आग लगने के बाद उनके पास खाने के दाने भी नहीं बचे। चारों छप्पर के अंदर रखा 75 मन तुड़ा, 10 क्विंटल बाजरा, 15 क्विंटल गेंहू जलकर राख हो गए। इसके अलावा फर्नीचर एवं कपड़े भी जलकर राख हो गए। कुल मिलाकर सवा लाख रुपये का नुकसान हो गया।
पड़ोसियों ने की मदद
सतप्रकाश ने बताया कि आग लगने के बाद पड़ोसियों ने जमकर मदद की। आग लगने के दौरान 2 भैंस तथा 2 कटड़ी छप्पर के अंदर बंधी हुई थी। पड़ोसी ने दौड़कर सभी भैंसों को खोलकर बाहर निकाला। इस दौरान बच्चे स्कूल गए हुए थे।
पीड़ित परिवार हुआ भावुक
आग की लपटों में अपना सामान जलता देखकर पीड़ित परिवार उसे देखकर भावुक हो गया। पिता बलबीर तथा मां बिमला देवी अपने आंसू नहीं रोक पाए। आसपास के लोगों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया।
हमारे पास खुद की जमीन भी नहीं है। पूरा परिवार दूसरों के खेत लेकर खेती का काम करता है। पूरे परिवार की साल भर की मेहनत कुछ घंटों में जलकर खाक हो गई। हम सरकार से मांग करते हैं उनकी नुकसान हुए सामान का उचित मुआवजा दे। --सतप्रकाश
भगवान ने उनके साथ यह अच्छा नहीं किया। पूरी साल की फसल आग की भेंट चढ़ गई। यहां तक खाने के दाने भी नहीं बचे। आगे वो अपनी आजीविका कैसे चला पाएंगे। वो क्या करें और कहां जाएं? हम सरकार से मांग करते हैं हमें उचित मुआवजा दिया जाए ताकि बच्चाों का पालन पोषण कर सके। - मां बिमला