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तीन दिन से बच्चों का डॉक्टर नहीं, परिजन परेशान

Sat, 22 Oct 2016 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। अगर आपका बच्चा बीमार है तथा उसे आप नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए ले जा रहे हैं तो वहां जाने से पहले वहां के चिकित्सकों की स्थिति का भी पता कर लें। नागरिक अस्पताल में बच्चों के लिए तीन दिन से कोई चिकित्सक नहीं आ रहा। इसके चलते यहां पर इलाज के लिए रोजाना आने वाले करीब 150 बच्चों के अलावा यहां एसएनसीयू वार्ड में इलाज के लिए भर्ती छह बच्चे रामभरोसे ही हैं। रात को व मोर्निंग शिफ्ट में फिर भी बच्चों की देखभाल हो रही है, मगर दिन में ओपीडी के समय बच्चों को देखने वाला कोई नहीं है। ऐसे में बीमार बच्चों के परिजन रह-रहकर सरकार व प्रशासन की व्यवस्था को कोस रहे हैं।
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नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा जग जाहिर है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह के समय यहां पर कई सुविधाएं प्राप्त हुई तथा बच्चों के लिए एसएनसीयू वार्ड भी बना, जो प्रदेश के गिने-चुने अस्पतालों में ही है। इस समय चिकित्सकों का भी ज्यादा अभाव नहीं रहा, मगर भाजपा की सरकार आने के बाद से नागरिक अस्पताल में फिर से चिकित्सकों का टोटा बन गया है। ऐसे में यहां पर बड़ों की क्या बच्चों की भी सही प्रकार से देखभाल नहीं हो रही। नागरिक अस्पताल में वैसे तो दो चाइल्ड स्पेशलिस्ट तैनात हैं, मगर एक कई दिनों से अवकाश पर चल रही हैं तथा दूसरे के बच्चे बीमार होने के कारण उन्होंने दो दिन से अवकाश लिया हुआ है। ऐसे में अस्पताल की सारी व्यवस्था चरमराई हुई है। अस्पताल में बच्चों के चिकित्सक न आने के कारण तीन दिन से बीमार बच्चों के माता-पिता दिनभर अस्पताल के चक्कर काटकर मजबूरीवश निजी चिकित्सकों को अपने बच्चों को इलाज कराने को मजबूर हैं। जिसके कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

अस्पताल में पांच, निजी के यहां 200 रुपये
नागरिक अस्पताल में पांच रुपये की पर्ची चिकित्सक को दिखाने के लिए कटती है, जबकि निजी अस्पताल संचालक एक बच्चे को देखने के लिए 200 रुपये ले रहे हैं। वहीं वे कम से कम 150 से 200 रुपये की दवाई अपने ही क्लीनिक से देते हैं। कई चिकित्सक तो जांच के नाम पर 400 से 1000 रुपये भी ले रहे हैं। ऐसे में लोग निजी चिकित्सकों के यहां लुटने को मजबूर हैं।
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150 के करीब आ रही रोज ओपीडी
नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 150 बच्चों की ओपीडी हो रही है। 150 बच्चे की पर्ची तो कट रही है, मगर देखा मुश्किल से पांच या दस बच्चों को जा रहा है।

लोगों ने किया हंगामा, लगाया सामान्य चिकित्सक
सुबह आठ बजे से बैठे-बैठे जब 10.30 बजे तक कोई चिकित्सक बच्चों के वार्ड में नहीं आया तो परेशान लोगों ने हंगामा कर दिया। उन्होंने कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक डा. धर्मेंद्र से मुलाकात की। जिस पर डा. धर्मेंद्र ने सामान्य चिकित्सक डा. अनिल को वार्ड में भेजा

आधा घंटा ही बैठा सामान्य चिकित्सक
बच्चों को देखने के लिए वैकल्पिक रूप से जिस चिकित्सक की व्यवस्था की गई थी, वे केवल साढ़े 11 बजे तक ही बैठे। इसके बाद वे चले गए। जिस कारण फिर से लोगों को परेशानी हुई।

एसएनसीयू वार्ड में भर्ती छह बच्चे, नहीं हो रही देखभाल
यहां पर बच्चों की देखभाल के लिए बने एसएनसीयू वार्ड में छह बच्चे दाखिल हमैं। जिनमें से चार के आक्सीजन लगी हुई है। इसके बावजूद दिन के समय कोई चिकित्सक इनको नहीं देखता तथा ये नर्स या अन्य स्टाफ के भरोसे ही हैं।

वे अपने बच्चों को लेकर दो दिन से अस्पताल के चक्कर काट रहीं है, मगर चिकित्सक ही नहीं है। इससे बड़ी परेशानी हो रही है। -कविता
नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की व्यवस्था करने में सरका फैल है। सरकार बच्चों के स्वास्थ्य की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। इससे लोग परेशान हैं। -बीरमति देवी
अस्पताल में चिकित्सक नहीं होना प्रशासन व सरकार की नाकामी है। इसके कारण उन्हें मजबूरी में निजी चिकित्सकों के यहां लुटना पड़ रहा है। -सुमन देवी
वे अपनी बेटी का इलाज कराने के लिए आए थे, दो घंटे बाद पता चला कि आज कोई चिकित्सक नहीं आएगा। इससे वे परेशान रह गए। -महेश शर्मा

बच्चों की एक चिकित्सक कई दिनों से अवकाश पर है, जबकि दूसरे चिकित्सक के जुड़वा बेटे हुए हैं। जिनकी तबीयत खराब होने के कारण वे उनको लेकर जयपुर गए हुए हैं। इसलिए थोड़ी परेशानी अवश्य हुई। बाद में उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था कर दी थी।---डा. धर्मेंद्र कुमार, कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल नारनौल।
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