महेंद्रगढ़। जनस्वास्थ्य विभाग ने शहर में पानी और सीवर के अवैध कनेक्शनों को नियमित करने अभियान शुरू कर दिया है। अब अवैध कनेक्शनों की पहचान जीपीएस से की जाएगी। विभाग की ओर से शहर में दिसंबर तक 4500 पानी और सीवर कनेक्शन नियमित किए जाएंगे। दिसंबर तक नियमित नहीं होने वाले कनेक्शन काट दिए जाएंगे।
शहर में करीब 50 हजार की आबादी है और इन सभी घरों में पेयजल व सीवर कनेक्शन वैध नहीं हैं। योजना के तहत हर महीने 400 सीवर के कनेक्शन किए जाएंगे और सितंबर तक 1250 कनेक्शन पूरा करने का लक्ष्य है। वर्तमान में शहर में 2500 पुराने सीवर कनेक्शन हैं, जबकि अब तक केवल 100 नए सीवर कनेक्शन ही हो पाए हैं।
अब बिना कनेक्शन ही विभाग की ओर से लोगों से लोगों सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इससे विभाग के पास खर्च भी बढ़ा है और राजस्व भी कम एकत्र हो पाया है। इससे सीवर सफाई व पेयजल लाइनों की मरम्मत के लिए बजट का अभाव बन जाता है। दूसरी ओर विभाग पानी के साथ ही सीवर कनेक्शन का चार्ज ले रहा है।
अब इसको अलग करने के लिए विभाग ने रूपरेखा तैयार की है। इसमें पुराने कनेक्शन नियमित करने के लिए निशुल्क सुविधा मिलेगी। वहीं, पानी और सीवर के नए कनेक्शन के लिए 1550 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
आवश्यक दस्तावेज और कनेक्शन प्रक्रिया
कर्मचारी राहुल ने बताया कि पानी या सीवर कनेक्शन नियमित कराने के लिए आधार कार्ड, मकान की जीपीएस के साथ फोटो और एक प्लंबर की रिपोर्ट जरूरी है। इन दस्तावेज को विभाग कार्यालय में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच जमा करवा सकते हैं। किसी उपभोक्ता को परेशानी होती है तो हेल्पलाइन नंबर 01285222277 से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
सत्यापन में कटेंगे अवैध कनेक्शन
जनस्वास्थ्य विभाग ने अवैध पानी और सीवर कनेक्शनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। कनेक्शन पहचान के लिए घर की जीपीएस फोटो लगाई जाएगी और इसी से कनेक्शन की पहचान होगी। जो कनेक्शन दिसंबर तक नियमित नहीं होंगे, उन्हें समीक्षा में काट दिया जाएगा।
वर्जन
अवैध पेयजल और सीवर कनेक्शन के लिए नई रूपरेखा तैयार की है। अब अवैध कनेक्शन पहचान के लिए जीपीएस का प्रयोग किया जाएगा। बिना जीपीएस फोटो के कनेक्शन अवैध माना जाएगा और इस तरह उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे जाएंगे। उपभोक्ता अपने नए व पुराने कनेक्शन समय सीमा वैध करवा लें।-जियालाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग, महेंद्रगढ़
फोटो संख्या:-57 बुस्टिंग स्टेशन जन स्वास्थ्य अभियात्रिंकी विभाग। संवाद