नारनौल। महीने भर पहले ८० से ९० रुपये किलो बिकने वाला सरसों का तेल त्यौहारी सीजन में आम आदमी की पहुंच से दूर होता दिख रहा है। त्यौहारी सीजन आते ही तेल की कीमतों में ३० से ४० रुपये का इजाफा हो गया है। तेल की कीमतों में आए उछाल से जहां आम आदमी परेशान है वहीं गृहणियों का बजट भी गड़बड़ा गया है। दीपावली पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले इस तेल ने लोगों का दीवाला निकाल दिया है।
त्यौहारी सीजन में लोगों का बजट बिगड़ने लगा है। हर किसी वस्तु में उछाल दिखाई दे रहा है। इसके कारण लोग परेशान होने लगे हैं। सरसों के तेल में तीन माह में बहुत अधिक उछाल आया है। वहीं अन्य खाद्य तेलों के दामों में भी उछाल देखा जा रहा है। रिफाइंड आयल भी तीन माह में दस रुपए प्रति लीटर बढ़ गया है। खाद्य तेलों में आ रहे इस उछाल ने गृहणियों के रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। इसके कारण गृहणियां भी परेशान होने लगी हैं।
दीपावली पर होती है सबसे ज्यादा खपत
दीपावली पर खाद्य तेलों की सबसे ज्यादा खपत होती है। इनमें सरसों के तेल की डिमांड सबसे अधिक रहती है। सरसों का तेल दीपावली पर खाद्य पदार्थ बनाने के अलावा दीपक जलाने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है। इसके कारण एक परिवार में दीपावली के मौसम में एक से दो लीटर तेल की खपत हो जाती है। वहीं अब दाम बढ़ने से लोग परेशान हो गए हैं।
स्टाक और फसल खराब होने से बढ़े दाम
व्यापारियों की अगर मानें तो सरसों के दाम में वृद्धि के दो कारण हैं। इनमें एक कारण गत वर्ष ओलावृष्टि और बरसात के कारण फसल खराब होना तथा दूसरा स्टाक रखना। व्यापारियों की माने तो तेल व्यापारी और किसान दोनों ही स्टाक रखते हैं। छोटे किसान तो अपनी सरसों को पहले बेच देते हैं, मगर बड़े किसान अपनी सरसों को फसल के दाम बढ़ने के बाद ही बेचते हैं। ऐसे में एकाएक दाम बढ़ जाते हैं। वहीं सरकार सरसों के स्टाक नियंत्रण की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। इसके कारण दाम बढ़ गए।
थोक के दामों में मामूली वृद्धि रिटेल में ज्यादा
सरसों के तेल के थोक के दामों में मामूली वृद्धि हुई है, जबकि रिटेल के दाम ज्यादा बढ़ गए हैं। सरसों के थोक के दाम तीन माह पूर्व ४३ रुपये से ४५ रुपये प्रति लीटर थे, जबकि अब ४७ रुपये से ४९ रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। वहीं रिटेल के तीन माह पहले दाम ९० रुपये प्रति लीटर थे, जो अब १२० रुपये प्रति लीटर पहुंच गए हैं।
रबी के मौसम में हो गई थी फसलें खराब
रबी की फसल के गत मौसम सरसों की फसल ओलावृष्टि और बरसात के कारण सरसों की फसल खराब हो गई थी। जिला में सरसों करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि पर बोई जाती है। इसमें करीब ३० से ४० हजार हेक्टेयर की फसल खराब हो गई थी। ओलावृष्टि और बरसात के कारण सरसों के दाने कमजोर पड़ गए। इससे कम तेल निकल रहा था।
आन लाइन मार्केट से भी बढ़ रहे दाम
व्यापारी भूपेंद्र कुमार, हरिओम, जयप्रकाश आदि ने बताया कि पूरा मार्केट आनलाइन हो गया है। दाम बढ़ने और घटने का सबसे मुख्य कारण यही है। इस मार्केट में छह-छह माह आगे के बाजार भाव बता दिए और तय कर दिए जाते हैं। इसके कारण पूरे देश के बाजार भाव अब एक साथ घटते व बढ़ते हैं। इससे काफी प्रभाव पड़ता है तथा स्टाक करने वाले उस चीज का स्टाक कर लेते हैं।
महेंद्रगढ़ जिला में होती है सबसे ज्यादा सरसों
प्रदेश में महेंद्रगढ़ जिला में सबसे ज्यादा सरसों की फसल बोई जाती है। यहां करीब एक लाख हेक्टेयर जमीन पर सरसों की फसल की बिजाई हर वर्ष होती है, जबकि अन्य जिलों में इससे कम बिजाई होती है।
हर बार महंगाई की मार आम जनता को ही झेलनी पड़ती है। इस बार भी मार आम जनता पर ही पड़ रही है। -कृष्णा
तेल के बढ़े दामों के कारण हाल बेहाल हो गया है। त्यौहारी मौसम में तेल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, मगर अब तेल के दामों में आग लग गई है। -कृष्णा शर्मा
सरकार को तेल के दामों और अन्य खाद पदार्थों के दामों पर नियंत्रण रखना चाहिए। नियंत्रण न होने के कारण महंगाई बढ़ गई है।--पुष्पा
पहले प्याज, फिर दाल अब तेल के बढ़े दामों के कारण रसोई का बजट बिल्कुल गड़बड़ा गया है।- सरोज देवी
&ड्डश्चशह्य;&ड्डश्चशह्य;सरसों के तेल के दाम गत रबी की फसल सही नहीं होने तथा किसानों व व्यापारियों द्वारा स्टाक रखने के कारण बढ़े हैं। आनलाइन मार्केटिंग पर भी सरकार का नियंत्रण होना चाहिए।--रत्नलाल, व्यापारी
तेल पहले प्रति लीटर अब
सरसों ९० १२०
रिफाइंड ७० ८०
फ्राच्यून ८० ८०
सफोला १५० १५०
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सरसों के तेल की बढ़ी कीमतों के बारे में व्यापारी ही कुछ सही बता सकते हैं। हाँ बरसात न होने के कारण इस बार सरसों की बुआई के रकबे का टारगेट पूरा नहीं हो पाएगा। इसलिए इस रबी के सीजन में भी किसान सरसों की फसल कम ही प्राप्त कर पाएंगे। -संजय यादव, एसडीओ, कृषि विभाग, नारनौल
&ड्डश्चशह्य;&ड्डश्चशह्य;सरसों के तेल की बढ़ती हुई कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार योजना बना रही है। दालों के स्टाक पर भी नियंत्रण रखा जा रहा है।--ओमप्रकाश यादव, विधायक, नारनौल