नागरिक अस्पताल में कई वर्षों से ब्लड बैंक की सुविधा नहीं हो पाई है। ब्लड बैंक न होने का खामियाजा गंभीर हालात में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को भुगतना पड़ता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं और सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से जख्मी मरीजों के तिमारदारों को ब्लड के लिए इधर-उधर भागना पड़ता है। अस्पताल में ब्लड स्टोरेज यूनिट तो हैं, लेकिन ब्लड स्टोरेज यूनिट में हर ग्रुप का एक या दो यूनिट ब्लड ही रखा जाता है।
इमरजेंसी की जरूरत के अनुसार यहां ब्लड रखा जाता है। मान लीजिए ब्लड स्टोरेज यूनिट में दो यूनिट ब्लड है और मरीजों को जरूरत दो यूनिट से ज्यादा की है तो ऐसी स्थिति में मरीज के तीमारदारों को डॉक्टर ब्लड लेने के लिए नारनौल भेज दिया जाता है। जिस वजह से मरीज के इलाज में काफी देर हो जाती है। नारनौल से महेंद्रगढ़ आने और जाने में करीब दो घंटे से भी ज्यादा का समय लग जाता है। ऐसे में मरीजों की जान भी चली जाती है। बता दें कि महेंद्रगढ़ नागरिक अस्पताल का विस्तार अगस्त 2019 में किया गया था। उस समय तत्कालीन शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा ने नागरिक अस्पताल को अपग्रेड करने का शिलान्यास पत्थर रखा था। चार माह बीत जाने के बाद भी नागरिक अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं हो पाई है। इस समय अस्पताल में ब्लड स्टोरेज यूनिट है। कनीना एवं महेंद्रगढ़ के 279 गांवों में यह सबसे बड़ा अस्पताल है। कनीना और सतनाली की रेफर महिलाएं यहां पर ही प्रसव करवाने के लिए आती हैं। महीने में लगभग 100 डिलिवरी हो जाती हैं। अधिकतर महिलाओं ने हीमोग्लोबिन की कमी रहती है जिसके लिए उन्हें खून की आवश्यकता है। कई बार तो खून मिल जाता है परंतु नहीं मिलने पर मरीजों को नारनौल के लिए रेफर कर दिया जाता है। इससे उनको आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक परेशानी उठानी पड़ती है।
गर्भवती महिलाओं को पड़ती है जरूरत
अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को सिजेरियन डिलिवरी के दौरान ब्लड की जरूरत पड़ती है। सिजेरियन डिलिवरी में ब्लड की जरूरत तब पड़ती है, जब मां के शरीर में ब्लड की कमी हो। डॉक्टर ने बताया कि सिजेरियन डिलिवरी के दौरान गर्भवती महिलाओं को ब्लड की जरूरत पड़ती है। डिलिवरी के समय गर्भवती महिला के अंदर कम से कम 11 ग्राम खून होना आवश्यक है। अधिकतर महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी की रहती है।
प्रति वर्ष औसत 600 यूनिट करते हैं रक्तदान
महेंद्रगढ़ में विभिन्न सामाजिक संस्थान प्रति वर्ष दस से 12 रक्तदान कैंप लगाती हैं। इन कैंपों में क्षेत्र के युवा बड़े उत्साह के साथ रक्तदान करते हैैं। प्रति वर्ष महेंद्रगढ़ एवं आसपास क्षेत्र से लगभग 600 यूनिट रक्तदान किया जाता है। उसके बाद क्षेत्र के मरीजों को समय पर खून नहीं मिल पाता।
ब्लड बैंक स्थापित करने के अलग नियम हैं। नियम, मानक पूरे होने पर ही ब्लड बैंक बनाया जा सकता है। ब्लड बैंक बनाने के लिए अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। महेंद्रगढ़ अस्पताल के अपग्रेड होने के बाद यहां ब्लड बैंक बनाया जाएगा। अभी अस्पताल अपग्रेडेशन की प्रक्रिया चल रही है।
- संतलाल वर्मा, सीएमओ, महेंद्रगढ़