महावीर चौक पर लगे होडिंग्स। संवाद
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शहर की मुख्य सड़कों और चौराहों पर लगे अवैध होर्डिंग शहर की सुंदरता को बिगाड़ रहे हैं। इससे नगर परिषद को हर वर्ष लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। क्योंकि नगर परिषद ने शहर में होर्डिंग व फ्लैक्स आदि लगाने के लिए स्थान निर्धारित किए हुए हैं। यहां पर होर्डिंग और फ्लैक्स लगाने पर नगर परिषद को हर वर्ष लाखों रुपये का राजस्व मिलता है, मगर विभिन्न शिक्षण संस्थानों सहित राजनीतिक पार्टियों के लोगों ने अपने होर्डिंग व फ्लैक्स को डिवाइडरों के बीच लगे खंभों और मुख्य चौराहों पर लगवा रखा है। इससे जहां शहर की सुंदरता खराब हो रही है, वहीं नगर परिषद को लाखों रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है।
बता दें कि किसी त्योहार या अन्य किसी विशेष अवसर पर शिक्षण संस्थान सहित विभिन्न पार्टियों के नेता अपना प्रचार करने के लिए शहर के मुख्य मार्गों पर अपने होर्डिंग लगवा देते हैं। निशुल्क प्रचार करने वालों पर नगर परिषद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है। जिससे शहर में अवैध होर्डिंग और फ्लैक्स की भरमार बढ़ती जा रही है। हालांकि नगर परिषद द्वारा अवैध होर्डिंग और फ्लैक्स को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाता है, मगर नियमित कार्रवाई नहीं होने के चलते दोबारा से शहर में होर्डिंग और फ्लैक्स की भरमार लग जाती है।
दुर्घटनाओं भी बना रहता है अंदेशा
मुख्य सड़क मार्ग पर लगे होर्डिंग और फ्लैक्स से दुर्घटना होने का भी अंदेशा बना रहता है, क्योंकि मुख्य मार्गों पर बड़े-बड़े होर्डिंग और फ्लैक्स लगे रहते हैं, जोकि सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों को अपनी तरफ देखने को आकर्षित करते हैं। इससे कई वाहन चालक अपना ध्यान भटक कर हादसे का शिकार हो सकता है। इसलिए न्यायालय ने भी मुख्य मार्गों पर बड़े होर्डिंग व फ्लैक्स लगाने पर रोक लगाई है। ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।
ऐतिहासिक चौराहे भी नहीं हैं अछूते
शिक्षण संस्थानों और राजनीतिक पार्टियों के लोगों ने शहर के विभिन्न स्थानों पर बने ऐतिहासिक चौराहों को भी नहीं छोड़ा है। शहर में महावीर चौक, आजाद चौक, राजीव चौक, महाराजा अग्रसेन चौक जैसे ऐतिहासिक चौराहे है। उक्त लोगों ने यहां भी अपने प्रचार के लिए होर्डिंग व फ्लैक्स लगवा दिए है। कुछ वर्ष पूर्व शहर के गणमान्य लोगों ने इन ऐतिहासिक चौराहों पर होर्डिंग और फ्लैक्स न लगाने तथा इनकी साफ-सफाई रखने के बारे में अधिकारियों को ज्ञापन दिया था, लेकिन कुछ दिनों तक लोगों की मांग पर अमल किया गया। मगर धीरे-धीरे दोबारा से वहीं हालत बनने लगी है।