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भारतीय जन-सामान्य के रोम-रोम में रचा-बसा है हिंदी दोहा : रामनिवास मानव

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नारनौल। दोहा हिंदी का सर्वाधिक लोकप्रिय छंद है, जो भारतीय जन-सामान्य के रोम-रोम में रचा-बसा है। जन-जागृति के लिए इसने हर युग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज भी निभा रहा है। यह कहना है दोहाकार और हरियाणा साहित्य व संस्कृति अकादमी पंचकूला की परामर्श-समिति के सदस्य डॉ. रामनिवास मानव का।
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उत्तराखंड बाल-साहित्य संस्थान व बाल-प्रहरी, अल्मोड़ा द्वारा दोहा-गायन कार्यशाला के रूप में आयोजित इस 1071वीं वर्चुअल राष्ट्रीय संगोष्ठी में वे बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। उन्होंने संस्थान के महासचिव व बाल-प्रहरी के संपादक उदय किरौला द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। उन्हें सच्चा बाल-निर्माता और जागरूक बाल-प्रहरी बताया। उन्होंने सर्दी पर केंद्रित दोहे भी प्रस्तुत किए, जिन्हें भरपूर सराहना मिली। इस अवसर पर संस्था के संरक्षक व अहमदाबाद (गुजरात) के पूर्व आयकर आयुक्त रामपलट पांडेय और उत्तराखंड शिक्षा विभाग अल्मोड़ा के उपनिदेशक डॉ. आकाश सारस्वत ने बाल-निर्माण के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण के कार्य में जुटे उदय किरौला व उनकी संस्थाओं की भूमिका के महत्त्व को रेखांकित करते हुए बाल-संस्कारों के परिष्कार पर जोर दिया।
इस विशिष्ट कार्यशाला में अपेक्षा राज, श्रीयांश रावत, दीपांशु भोज, हर्षित जोशी (अल्मोड़ा), मुस्कान (उत्तरकाशी), रिया गुप्ता, भावेश महतोलिया, अपेक्षा जोशी, रागिनी सिंह (उधमसिंह नगर), मयंक भाटिया (पिथौरागढ़), खुशी कोहली (बागेश्वर) और अंकित जांगिड़ (सीकर) सहित देश के एक दर्जन से अधिक बाल-प्रतिभागियों ने कबीर, तुलसी, बिहारी और रहीम के दोहों का सस्वर पाठ व उनकी व्याख्या प्रस्तुत की।
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