नारनौल। श्री गोपाल गौशाला में शुक्रवार को गौशाला प्रबंधन द्वारा इस्तीफा देने के बाद गौशाला में गायों की देखभाल की जिम्मेवारी जिला प्रशासन ने ली थी, लेकिन 24 घंटे बीतने के बाद भी जिला प्रशासन की तरफ से गौशाला में गायों की सुध लेने न अधिकारी और न कोई कर्मचारी पहुंचा। इसके अलावा निवर्तमान कमेटी का भी कोई सदस्य गौशाला नहीं पहुंचा। शुक्रवार को कई लोग अपनी राजनीति चमकाने तो कई प्रबंधन के समर्थन में गौशाला पहुंचे थे, लेकिन सेवा के लिए अपने स्तर पर बनाई अस्थायी कमेटी के सदस्यों के अलावा कोई भी व्यक्ति गौशाला नहीं पहुंचा। दूसरी तरफ आसपास के गांवों के बुजुर्गों ने गौशाला पहुंचकर व्यवस्था देखने के बाद गौ-सेवा में लगे अस्थायी कमेटी के सदस्यों के कार्य की सराहना कर उनका हौसला बढ़ाया और गौ सेवा के लिए प्रेरित किया।
गौशाला पहुंचे ग्रामीण बुजुर्ग राज सिंह आर्य, हरद्वारी लाल, रामौतार, दीपक, नीरज, रामेश्वर सरपंच सेका और रामचंद्र ने कहा कि गौशाला प्रबंधन द्वारा इस्तीफा देने के बाद अगर जिला प्रशासन ने गायों की देखभाल की जिम्मेदारी ली थी तो उन्हें आना चाहिए था, लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि एक दिन बीतने के बाद भी जिला प्रशासन की तरफ से कोई अधिकारी या कर्मचारी गौशाला नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर जिला प्रशासन नहीं आ सकता था तो गायों की देखभाल के लिए कोई न कोई व्यवस्था जरूर करनी चाहिए थी।
गायों के चारे की नहीं है व्यवस्था
बुजुर्गों और अस्थायी कमेटी के सदस्यों ने बताया कि गौशाला में गायों के लिए केवल एक दिन का ही चारा बचा है। अन्य गौशालाओं में गायों के लिए एक-दो महीने के चारे का स्टोरेज रखा जाता है, ताकि किसी प्रकार की समस्या होने पर गायों को समय पर चारा दिया जा सके, लेकिन निवर्तमान प्रबंधन द्वारा गोपाल गौशाला में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। निवर्तमान गौशाला प्रबंधन ने जान बूझकर कई प्रकार की समस्याएं छोड़ गया है, जिन्हें बिना किसी के सहयोग से कर पाना मुश्किल है। उन्होंने गौ-भक्तों से भी आह्वान किया कि जब तक कोई स्थायी कमेटी नहीं चुनी जाती तब तक वे गौशाला में श्रमदान अवश्य करें ताकि गायों की देखभाल ठीक प्रकार से की जा सके।
गौशाला प्रबंधन ने बिगाड़ी व्यवस्था
गौशाला के निवर्तमान प्रबंधन ने व्यवस्था बिगाड़ कर रख दी है। प्रबंधन के इस्तीफे के साथ ही गौशाला की सेवा के लगी लेबर के लिए खाने की व्यवस्था करने वाले और गायों का दूध निकालने वाले लोग भी गोशाला छोड़कर अपने गांव चले गए हैं। गौ-भक्तों ने बताया कि गौशाला प्रबंधन ने जानबूझकर इन लोगों को छोड़ने पर मजबूर किया होगा, क्योंकि अन्य लेबर गौशाला में कार्य कर रही है। गौ-भक्तों ने कहा कि गौशाला के निवर्तमान प्रबंधन की मंशा रही होगी की अगर गौशाला के कार्य में लगी लेबर को समय पर खाना नहीं मिलेगा तो वे भी छोड़ने पर विवश हो जाएंगे। इसी प्रकार अगर गायों का समय पर दूध नहीं निकलेगा तो उनको भी परेशानी होगी।
गौशाला की सहायता के लिए आगे आए लोग
शुक्रवार के हंगामे की सूचना जैसे ही गौ-भक्तों को लगी तो वे अपने स्तर पर गौशाला की सहायता के लिए आगे आने लगे हैं। इसी कड़ी में शहर निवासी दीपक और नीरज ने संयुक्त रूप से गौशाला के लिए 10252 रुपये की राशी देकर अपना सहयोग किया है। वहीं कई लोग चारा उपलब्ध करवाकर अपना सहयोग दे रहे हैं। गौ-भक्तों ने कहा कि वे गायों को भूखे नहीं मरने देंगे। उनको प्रशासन का सहयोग मिले या ना मिले। वे गौ-हित के लिए तन, मन और धन से कार्य करते रहेंगे।
कोट
मैंने गौशाला में गायों की देखभाल करने के लिए एक अस्थाई कमेटी बनाने के बारे में एक प्रस्ताव एसडीएम को भेजा है। एसडीएम ने उस प्रस्ताव को डीसी के पास भेज दिया है। अस्थाई कमेटी बनने के बाद ही गौशाला के चुनाव होने तक गायों की देखरेख की जा सकेगी। इस कमेटी में वे ही लोग होंगे, जो किसी न किसी रूप में पूर्व में गौशाला से जुड़े हुए हैं। -ईश्वर सिंह, तहसीलदार, नारनौल