नारनौल। बेशक केंद्र और राज्य सरकार समय-समय पर स्वच्छता अभियान चलाकर लोगों को स्वच्छता का संदेश दे रहे हों, मगर नारनौल शहर में सफाई के हालात अभी सुधरे नहीं हैं। शहर की सफाई व्यवस्था बिल्कुल चरमराई हुई है। करीब एक लाख लोगों की आबादी वाले शहर के पुराने 23 वार्डों के सैकड़ों मोहल्लों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। यही कारण है कि शहर में अनेक जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इनसे उठ रही दुर्गंध के कारण लोगों का हाल बेहाल है। वैसे तो शहर के साफ सफाई का जिम्मा 185 लोगों के हाथ है, मगर हकीकत में इनमें से केवल 100 लोग ही सफाई व्यवस्था में लगे हैं। यही सफाई व्यवस्था के बिगड़ने का मुख्य कारण माना जा रहा है।
सफाई-व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने हेतु भले ही नगर परिषद ने करीब एक लाख की आबादी वाले शहर को चार जोन में बांटा हुआ है, किंतु इसके बावजूद नगर में सफाई का बुरा हाल है। नगर परिषद नारनौल के अंतर्गत पुराने 23 वार्ड बने हुए हैं तथा इन 23 वार्डों को चार जोन में बांटा गया है। इन चार जोन में से तीन जोन की सफाई का कार्य 185 कर्मचारियों के जिम्मे है। इनमें से 129 कर्मचारी डेली वेजिज या ठेके पर हैं, जबकि 56 कर्मचारी नगर परिषद के स्थायी सफाई कर्मचारी हैं। इनमें जोन नंबर एक में पक्के कर्मचारियों के अलावा जोन नंबर दो में 45 व जोन नंबर तीन में 41 और जोन नंबर चार में 43 कर्मचारी कार्यरत हैं। सफाई व्यवस्था ठीक रखने के लिए इतने कर्मचारी होने के बावजूद भी शहर में सफाई व्यवस्था लचर बनी हुई है तथा शहर में जगह-जगह पर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं।
185 में से ज्यादातर कर्मचारी अन्य कार्य में व्यस्त
इन 185 कर्मचारियों में से ज्यादातर कर्मचारी विभिन्न कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इनमें से करीब 35 से अधिक कर्मचारी विभिन्न अधिकारियों की कोठियों पर ड्यूटी कर रहे हैं। 32 कर्मचारी शहर में कूड़ा उठाने के लिए चल रही ट्रालियों में लगे हुए हैं। कूड़ा उठाने के लिए लगाए गए आठ टैंपुओं पर भी 16 कर्मचारी लगे हुए हैं जबकि रिकार्ड के अनुसार करीब 60 कर्मचारी बुजुर्ग की श्रेणी में भी आते हैं। इनसे काम कम ही होता है। इस प्रकार 83 कर्मचारी विभिन्न जगहों पर काम कर रहे हैं। जबकि दो कर्मचारी लंबे समय से अवकाश पर चल रहे हैं। शेष 100 कर्मचारी ही सही रूप में काम पर लगे हुए हैं। इस प्रकार हकीकत में 100 कर्मचारियों द्वारा एक लाख की आबादी वाले शहर की सफाई व्यवस्था का सही ढंग से चलाने में दिक्कत आ रही है। इनमें से भी कई कर्मचारी रोजाना छुट्टी पर भी रहते हैं।
कूड़ा उठान के लिए लगे हैं आठ ट्रैक्टर व आठ टैंपू
शहर में कूड़ा उठाने के लिए नगर परिषद द्वारा आठ ट्रैक्टर व इतने ही टैंपू का इंतजाम किया गया है। इनमें तीन ट्रैक्टर नगर परिषद के हैं, जबकि पांच ट्रैक्टर प्राइवेट हायर किए गए हैं। इनके द्वारा रोजाना शहर के बाजारों, विभिन्न मार्गों व गली मोहल्ला से कूड़ा उठाया जाता है।
कौन-कौन से वार्ड हैं जानों में शामिल
सफाई कार्य के लिए पहले जोन में वार्ड नंबर एक, 20, 21, 22 व 23, दूसरे जोन में वार्ड नं 16, 17, 18, 19 व 20 हैं। जोन नंबर तीन में वार्ड नंबर आठ, नौ, 10, 11, 12, 13, 14 व 15 को शामिल किया गया है। चौथे जोन में वार्ड नंबर दो, तीन, चार, पांच, छह व सात शामिल हैं। ये सभी पुराने वार्ड हैं।
हमारे वार्ड में सफाई का बुरा हाल है। यहां पर लगा हुआ कर्मचारी नियमित रूप से नहीं आता। इसके कारण वार्ड के सभी मोहल्लों में गंदगी फैली हुई है। लोगों को काफी परेशानी हो रही है।---अभय सिंह
शहर में इन दिनों सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। शहर में कई जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इनका सही उठान नहीं होता। इससे आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी होती है।
-हुकुम सिंह
हालांकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर सफाई की तरफ बहुत ध्यान दे रहे हैं तथा लोगों को सफाई के प्रति प्रेरित भी कर रहे हैं। इसके बावजूद लोग व नगर परिषद के कर्मचारी शहर को गंदा करने में लगे हैं।
-रतन कुमार
शहर को साफ स्वच्छ रखना सभी का कर्तव्य है। लोगों को भी इसमें जागरूक होना होगा, नगर परिषद अगर सही ढंग से साफ सफाई करे तो शहर बिल्कुल साफ सुधरा दिखाई दे, मगर शहर की हालत इन दिनों काफी खराब बने हुए हैं। गली मोहल्लों से कूड़े का उठान नहीं हो रहा है।
-सुभाष
शहर में सफाई व्यवस्था का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। हर वार्ड से सफाई कर्मचारी सफाई कर रहा है। कहीं पर भी कोई शिकायत नहीं है। सफाई के साथ-साथ कूड़े उठाने का कार्य भी सही ढंग से चल रहा है, फिर भी कहीं कोई कमी रह गई तो उसे भी दूर किया जाएगा। -मोहन भारद्वाज, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद नारनौल