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जिले की 53 साल में बदली तस्वीर, फिर भी इंडस्ट्री की दरकार

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गांव कोरियावास में बनने वाला मेडिकल कॉलेज। - फोटो : Narnol
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हरियाणा के अस्तित्व में आने के 53 साल में महेंद्रगढ़ जिला भी विकास की ओर अग्रसर है। महेंद्रगढ़ में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद जिले का नाम शिक्षा क्षेत्र में बढ़ा है। पिछले साल सरकार ने कोरियावास गांव में मेडिकल कॉलेज की नींव रखी थी। इससे पहले यहां पर आयुर्वेदिक मेडिकल एवं अस्पताल बनकर तैयार है। ऐसे में आने वाले समय में नारनौल में लोगों को बेहतर हेल्थ सुविधाएं मिल सकेगी। अभी तक जिला मुख्यालय की सड़क की कनेक्टिविटी बेहतर नहीं है। ऐसे में उम्मीद है कि रेवाड़ी-सिंघाणा हाईवे, नांगल चौधरी-नारनौल हाईवे, 152डी हाईवे बन जाने के बाद यहां के लोगों का जीवन स्तर और बेहतर होगा। हालांकि यहां पर अभी इंडस्ट्री की दरकार है।
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बता दें कि आजादी के बाद 1948 में महेंद्रगढ़ जिला अस्तित्व में आया था। जिले का गठन 1948 में पटियाला रियासत की नारनौल व महेंद्रगढ़, जींद रियासत की दादरी तहसील व नाथ रियासत की बावल निजामत का कुछ हिस्सा मिलाकर महेंद्रगढ़ का गठन हुआ। गठन के समय से ही नारनौल जिला मुख्यालय है। यहां शिक्षा के गिने चुने स्कूल-कॉलेज होते थे, अब यहां इनकी भरमार है। यही कारण है जिला महेंद्रगढ़ को शिक्षा हब के रुप में माना जाता है। हरियाणा बनने के बाद 53 साल में जिले की तस्वीर भी बदली है।
केंद्रीय विश्वविद्यालय
महेंद्रगढ़ के पाली में केंद्रीय विश्वविद्यालय होने से जिले का नाम शिक्षा क्षेत्र में बढ़ा है। यहां पर देशभर से छात्र शिक्षा लेने के लिए आ रहे हैं। यहां पर सभी प्रमुख विषयों में पाठन-पाठन की सुविधा उपलब्ध है। जिले में केंद्रीय विश्वविद्यालय होने से स्थानीय के साथ प्रदेश के छात्रों को भी बेहतर शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध हो रही है।
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आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज
कांग्रेस सरकार ने नारनौल के पटीकरा में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज बनवाया था। यहां पर मेडिकल की पढ़ाई शुरू होना बाकी है। हालांकि अस्पताल में मरीजों का उपचार चल रहा है। यह प्रदेश का दूसरा आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज है। इसके शुरू होने से लोगों को बेहतर आयुर्वेदिक सेवाएं मिल सकेगी।
मेडिकल कॉलेज
पिछले साल मनोहर सरकार ने गांव कोरियावास गांव मेडिकल कॉलेज की नींव रखी थी। 500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस मेडिकल कॉलेज व अस्पताल पर कार्य चल रहा है। इसे दो साल में बनाने का लक्ष्य है। इसके बाद जाने जिले के साथ राजस्थान के कई गांवों के लोगों को बेहतर हेल्थ सेवाएं मिल सकेगी।
काला पानी की छवि को तोड़ने का प्रयास
राजधानी चंडीगढ़ से दूरी व राजस्थान बॉर्डर से सटे होने के कारण जिला हर मामले में पिछड़ता रहा। जिसके कारण अधिकारी भी इस जिले में पोस्टिंग से कतराते थे। इसे काले पानी के नाम से जाना जाता था। यातायात व शहर के विकास न होने के कारण लोगों को परेशानी होती थी। केंद्रीय विश्वविद्यालय, आयुर्वेदिक मेडिकल, बहुतकनीकी संस्थान व स्कूल- कॉलेजों व सड़कों का जाल बिछाकर सरकार पुरानी छवि को तोड़ने का प्रयास कर रही है। हालांकि सरकार ने महेंद्रगढ़ में आईएमटी व नांगल चौधरी में लाजिस्टिक हब प्रस्तावित है।
ऐतिहासिक धरोहर
जिले में अनेक ऐतिहासिक धरोहर हैं। नारनौल शहर में आज भी अनेक मुगलकालीन वास्तुकला की बेहतरीन बानगी को पेश करते स्मारक प्राचीन गौरवगाथा के गवाह हैं। जिनमें मुख्य रूप से जल महल, राय बाल मुकंद का छत्ता (बीरबल का छत्ता), इब्राहिम खान का मकबरा, चोर गुम्बद तथा ढोणी की पहाड़ी ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात है। वहीं, महेंद्रगढ़ में माधोगढ़ का किला क्षेत्र की गौरवगाथा का गवाह हैं।
शुरूआत से नारनौल रहा जिला मुख्यालय
जिला महेंद्रगढ़ का जन्म प्रदेश के गठन से भी बहुत पहले 1948 में हो गया था। पहले यह संयुक्त पंजाब का जिला था। साल 1966 में हरियाणा के गठन के बाद हरियाणा का जिला बन गया। जिले का कुछ क्षेत्रफल 1899.6 वर्ग किलोमीटर है। नारनौल शुरू से ही जिला मुख्यालय रहा है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या 992088 है। इसमें पुरुष 486665 व महिलाएं 435423 है। साक्षरता दर 78.9 प्रतिशत है।
गिने चुने स्कूल-कॉलेज थे
साल 1966 की बात की जाए तो जिले में केवल एक कॉलेज, तीन सीनियर सेकेंडरी स्कूल व एक हाई स्कूल था। अब करीब पांच सौ सरकारी स्कूल हैं। वहीं, 15 कॉलेज सरकारी हैं। जबकि, बीएड कॉलेज नारनौल में स्थित है। वहीं एक सरकारी पालीटेक्निक संस्थान व करीब नौ आईटीआई जिले में हैं।
लोगों से बातचीत
जिले का बदलाव तो हुआ हैं लेकिन जिला मुख्यालय के अनुसार कार्य नहीं हुए हैं। लंबे समय तक जिला उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां की ऐतिहासिक विरासतों को संजोकर रखा जाता तो भी बेहतर होता। जिले में सड़कों की कनेक्टिविटी बेहतर नहीं है। अन्य जिलों की अपेक्षा जिला अभी भी पिछड़ा हुआ है।
रतन लाल कटारिया, जिला संयोजक, इंटेक
जिले का विकास तो हुआ है, खासकर शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुआ है। पहले यहां के लोग पहले पुलिस व फौज में भर्ती होते थे। अब हर क्षेत्र में यहां के लोगों के भागीदारी बड़े पदों पर बढ़ी है। अभी भी कई मामलों में जिला पिछड़ा हुआ है। जिले में नहरी पानी के साथ साहित्यिक व सांस्कृतिक विकास नहीं हुआ है। ऐतिहासिक विरासतों की अनदेखी जारी है।
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- डॉ. रामनिवास मानव, वरिष्ठ साहित्यकार
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