फोटो 02 दरवाजा खोलते ही पिंजरे में जाते कबूतर और साथ में खड़ी अजीत। संवाद
- फोटो : घायलों को एंबुलेंस से बाहर निकालते हुए स्वास्थ्यकर्मी। स्रोत संवाद
नारनौल। अक्सर देखने में आता है कि लोग अपने घरों में ज्यादातर कुत्ता और बिल्ली पालते हैं लेकिन इन सबके विपरीत अजीत ने अपने घर में सफेद कबूतर, खरगोश व बतख पाल रखे हैं। अविवाहिता अजीत इन जीवों को अपने बच्चों की तरह ही पालती हैं। ये जानवर सारा दिन घर के आंगन में विचरते रहते हैं।
अजीत मुफ्त में ही कई जोड़े कबूतरों के लोगों को बांट भी चुकी हैं। नौकरी के दौरान उनकी एक महिला साथी ने 2015 में उनको एक सफेद कबूतर का जोड़ा लाकर दिया था। अब इन कबूतरों की संख्या 30 के करीब हो चुकी है। सुबह के समय पिंजरे में बाहर निकालने के बाद अजीत इन्हें चुग्गा डालती है।
चुग्गा खाने के बाद ये सभी आसपास में उड़ते रहते हैं। दोपहर करीब एक बजे अजीत इनके पिंजरे का जैसे ही दरवाजा खोलती है, सारे के सारे कबूतर उड़ते हुए वापस पिंजरे में पहुंच जाते हैं।
अजीत ने बताया कि उसके खुद के तो कोई बच्चे हैं नहीं जो बच्ची गोद ली थी उसकी भी शादी कर दी। अब ये ही मेरा परिवार है और इन्हीं का ख्याल रखकर उसका समय तो व्यतीत होता ही है। साथ ही इन्हें देखकर मन भी प्रसन्न रहता है।
रेवाड़ी से मंगाया बतख का जोड़ा
तीन माह पहले अजीत ने रेवाड़ी से साढ़े 3 हजार रुपये में बतख का जोड़ा मंगाया था। अजीत ने इनके लिए एक छोटा सा तालाब भी बनाया रखा है, जहां ये तैरते रहते हैं और चुग्गा खाने के लिए कबूतरों के पास पहुंच जाते हैं।
एक युवक ने फ्री में दिए खरगोश
शहर के ही एक युवक ने 2024 में अजीत को जगह के अभाव के चलते दो जोड़े खरगोश के दिए थे। उस समय ये काफी छोटे थे। उस समय अजीत इनको अपने कमरे में ही रखती थी और जब ये बड़े हो गए तो अजीत ने इन्हें खुले में छोड़ दिया। खरगोश यहां पर उगी घास के अलावा पेड़ों के पत्ते खा लेते हैं। इसके अलावा अजीत कुछ न कुछ इन्हें खिलाती रहती है।