महेंद्रगढ़। गांव आकोदा बस स्टैंड पर स्थित किराणा स्टोर की दुकान पर शार्ट सर्किट से आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि बुझाने में दो से तीन घंटे लग गए थे। जब तक आग बुझाई जाती तब तक दुकान के अंदर का लगभग सामान जल गया था।
गांव आकोदा (खरकड़ा) निवासी संजय ने बताया कि गांव आकोदा बस स्टैंड पर उसकी किराणा की दुकान है। बीती रात लगभग आठ बजे वह दुकान बंद कर घर चला गया था। अगले दिन सुबह करीब 9:15 बजे उसके पास किसी का फोन आया था कि उसकी दुकान से धुआं निकल रहा है। जब वह मौके पर पहुंचा तो दुकान के अंदर आग लगी हुई थी। उसने बताया कि दुकान के चार शटर लगे हुए हैं। जब दो शटर को खोले तो आग हवा से और तेज हो गई। आग को बुझाने के लिए टैंकर, मोटर आदि से प्रयास किए गए। इसी दौरान दमकल को आग की सूचना दी गई। आग इतनी तेज थी कि दमकल गाड़ी पहुंचने तक सारा सामान जलकर राख हो गया था। आग बुझाने में दो गाड़ियां लगाई गई थीं। पीड़ित ने आकोदा चौकी को इसकी सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मौका मुआयना किया।
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20 लाख रुपये का हुआ नुकसान:
पीड़ित दुकानदार ने बताया कि दुकान के अंदर तीन डी फ्रीज, चार काउंटर, फर्नीचर जल गए। उसने बताया कि दुकान के अंदर घी, तेल, रिफाइंड तेल के पीपे तथा अन्य किराणा का सामान जलकर राख हो गया। पीड़ित दुकानदार ने सरकार से मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
बगल की दुकानों को बचाया:
पीड़ित दुकानदार संजय ने बताया कि बगल की दुकानों को मिलकर प्रयास कर बचा लिया। उन्होंने बताया कि उसकी बगल में जूता चप्पल तथा कपड़े की दुकान हैं। दोनों दुकानों बचाने के लिए लोगों ने सामान को बाहर निकाल दिया जिस वजह से दोनों ही दुकानें बच गईं।
दमकल कर्मचारियों पर लगाया आरोप:
दुकान मालिक संजय ने दमकल कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने फायर ब्रिगेड को 9:35 बजे फोन किया था लेकिन उन्होंने झूठ बोल दिया था कि गाड़ी यहां से रवाना हो गई है। जब गाड़ी नहीं पहुंची तो उसके साथी ने अपने भाई अभय के पास फोन किया जो महेंद्रगढ़ में अग्निशमन स्टेशन के पास ही रहता है। अभय ने जाकर उनको आग की सूचना दी। बाद में दमकल गाड़ी 10:45 बजे पहुंची। तब तक सारा सामान जलकर राख हो गया था। संजय ने बताया कि अगर समय रहते दमकल गाड़ी पहुंच जाती तो शायद उसका बहुत सा सामान जलने से बच सकता था।
हमारे पास कर्मचारी को अग्निशमन स्टेशन पर सूचना देने के लिए कोई नहीं आया। जिस अभय सिंह की वो बात कर रहे हैं उसका 9:35 बजे का फोन आया था। फोन आते ही हमनें गाड़ी भेज दी थी। 10:00 बजे गाड़ी ने पहुंचकर आग बुझाना शुरू कर दिया था। जो आरोप कर्मचारियों पर लगाए गए वो सरासर निराधार हैं।
-राकेश कुमार, इंचार्ज, अग्निशमन स्टेशन।